12.4 C
London
Friday, February 27, 2026
Homeभारत को महंगा पड़ सकता है अमेरिका-चीन 'सीजफायर', ड्रैगन के सामने कितने...

भारत को महंगा पड़ सकता है अमेरिका-चीन ‘सीजफायर’, ड्रैगन के सामने कितने दिन टिक पाएंगे हम!

Published on

नई दिल्ली

घरेलू शेयर बाजार में तेजी का माहौल था। निवेशक खुश थे। अप्रैल से अब तक विदेशी निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार में लगभग 2 बिलियन डॉलर का निवेश किया है। लेकिन अमेरिका और चीन का टैरिफ सीजफायर इसमें भारतीय बाजार पर भारी पड़ सकता है। दोनों देशों ने एकदूसरे पर हाल में लगाए गए भारी टैरिफ में कटौती की है। यह व्यवस्था आज से लागू हो गई है और 90 दिन तक जारी रहेगी। ऐसी स्थिति में विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालकर एक बार फिर चीन में लगा सकते हैं। अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वार से भारत निवेशकों के लिए सुरक्षित जगह बन गया था।

सीएलएसए के विश्लेषकों ने कहा है कि चीन और अमेरिका के बीच समझौता होने से भारत का आकर्षण कम हो सकता है। मार्च से भारत का बाजार सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला दूसरा बाजार था। व्यापार युद्ध के डर से विदेशी निवेशक भारत में पैसा लगा रहे थे। हालांकि कुछ जानकारों का कहना है कि वे चीन की वापसी की कहानी पर विश्वास नहीं करते हैं। ओम्नीसाइंस कैपिटल के सीईओ डॉ. विकास गुप्ता का कहना है कि चीनी बाजार ने निवेशकों को लंबे समय में कोई फायदा नहीं दिया है।

चीन की समस्याएं
गुप्ता ने कहा कि MSCI चीन ETF (MCHI) 2011 से आज तक लगभग स्थिर है जबकि चीन की GDP बहुत तेजी से बढ़ी है। इससे पता चलता है कि चीन में कंपनियों के वैल्यू बनाने में कुछ समस्या है। कुछ समय के लिए चीन में निवेश बढ़ सकता है लेकिन लंबे समय के लिए चीन में निवेश की संभावना कम है। वहां की इकॉनमी में कई समस्याएं हैं। मसलन चीन पर कर्ज बहुत ज्यादा है, काम करने वाले लोगों की संख्या घट रही है और बैंकों की हालत भी कमजोर है। इन कारणों से FII चीन में निवेश करने से डरेंगे, भले ही टैरिफ कम हो जाए।

वाटरफील्ड एडवाइजर्स के विवेक राजारामन का मानना है कि चीन में कुछ समय के लिए तेजी आ सकती है। चीन में आर्थिक सुधार हो रहा है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में भी अच्छी सफलता पाई है। इससे चीन निवेशकों को आकर्षित कर सकता है। ट्रेड वार के कारण भारत को जो फायदा मिल रहा था, वह अब अमेरिका-चीन डील के कारण कम हो सकता है। इसलिए, कुछ समय के लिए FII का निवेश चीन में बढ़ सकता है।

भारत की मजबूती
लेकिन भारत को अभी कम नहीं आंकना चाहिए। राजारामन ने कहा कि भारत की ग्रोथ स्टोरी अब भी मजबूत है। FII पिछले कुछ महीनों में वापस आए हैं क्योंकि भारत की करेंसी स्थिर है और बाजार में तेजी है। कई भारतीय कंपनियां ऐसी हैं जिन पर चीन के व्यापार का असर नहीं होता है। इनमें फार्मा और IT कंपनियां शामिल हैं। लेकिन असली मुकाबला मैन्युफैक्चरिंग में हो सकता है। चीन से आने वाला इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल और कुछ हद तक फार्मास्युटिकल API फिर से सस्ता हो सकता है।

उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते से चीन से दूसरे देशों में शिफ्ट होने की लागत बढ़ जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में कुछ बदलाव भारत में हुआ है। लेकिन भारत को अपनी उत्पादन, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करना होगा ताकि वह प्रतिस्पर्धी बना रहे। अमेरिका और चीन के बीच समझौता वैश्विक सप्लाई चेन को फिर से बनाने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है लेकिन चाइना प्लस वन जारी रहेगा। भारत अब भी इस प्रक्रिया में शामिल रहेगा। भारत और यूके के बीच समझौते से एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा।

Latest articles

दिल्ली शराब घोटाला केस: कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को किया बरी

Arvind Kejriwal और Manish Sisodia को दिल्ली शराब नीति से जुड़े मामले में बड़ी...

नियुक्ति की मांग को लेकर भोपाल की सड़कों पर उतरे वर्ग-2 के चयनित शिक्षक

भोपाल मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती वर्ग-2 के चयनित अभ्यर्थियों के सब्र का बांध अब टूट...

प्रदेश में जल्द शुरू होगी सीएम केयर योजना गंभीर बीमारियों का राज्य में ही होगा इलाज

भोपाल मध्य प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर तीखी चर्चा...

नई परिवहन नीति के विरोध में निजी बस ऑपरेटरों का हल्ला बोल 2 मार्च से बेमियादी हड़ताल का ऐलान

भोपाल मध्य प्रदेश की नई परिवहन नीति के विरोध में निजी बस संचालकों ने आंदोलन...

More like this

संबलपुरी परिवार ने मधुबन गार्डन में उल्लास और परंपरा के साथ मनाया पुष्पुनी तिहार

पॉवर पश्चिमी ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक पुष्पुनी तिहार का भव्य आयोजन रविवार...

11वीं की छात्रा से दुष्कर्म मामले में ‘यासीन मछली गैंग’ से जुड़ा जिम संचालक गिरफ्तार

भोपाल राजधानी भोपाल में 11वीं की नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग के मामले में...