6.5 C
London
Sunday, April 19, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीयब्रह्मोस के हाइपरसोनिक वेरिएंट में शामिल होगी जिरकॉन मिसाइल की तकनीक, चीन-पाक...

ब्रह्मोस के हाइपरसोनिक वेरिएंट में शामिल होगी जिरकॉन मिसाइल की तकनीक, चीन-पाक की उड़ेगी नींद

Published on

मॉस्को

भारत और रूस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के नए वेरिएंट को बनाने पर तेजी से काम कर रहे हैं। ब्रह्मोस-2 नाम की यह मिसाइल हाइपरसोनिक स्पीड से चलने में सक्षम होगी। इतना ही नहीं, इस मिसाइल में रूस की सबसे घातक जिरकान मिसाइल की टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जाएगा। जिरकान दुनिया में सबसे तेज गति से चलने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल है। इसकी स्पीड 6100 किलोमीटर से लेकर 11000 किलोमीटर तक है। वर्तमान में ब्रह्मोस दुनिया की एकमात्र ऐसी मिसाइल है जिसे जमीन, हवा, पानी और पनडुब्बी से लॉन्च किया जा सकता है। इस मिसाइल को भारत और रूस ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। इस मिसाइल के अलग-अलग वेरिएंट्स की रेंज 300 से 700 किलोमीटर के बीच है।

पांच से छह साल में पहली उड़ान भरेगी ब्रह्मोस-2 मिसाइल
रूसी समाचार एजेंसी तास से बात करते हुए ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ अतुल राणे ने कहा कि ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के हाइपरसोनिक वेरिएंट ब्रह्मोस-II का काम अडवांस स्टेज में है। इसमें जिरकॉन हाइपरसोनिक मिसाइल की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। ब्रह्मोस-2 की पहली उड़ान पांच से छह साल में आयोजित की जा सकती है। ब्रह्मोस के हाइपरसोनिक वेरिएंट को रूस के रिसर्च एंड प्रोडक्शन एसोसिएशन ऑफ मशीन-बिल्डिंग  और भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) साथ मिलकर विकसित कर रहे हैं।

रूस की जिरकॉन मिसाइल की तकनीक का होगा इस्तेमाल
अतुल राणे ने बताया कि दोनों पक्षों ने हाइपरसोनिक वर्जन के डिजाइन पर काम किया है। उन्होंने कहा कि जब वे (रूस) हमें तकनीक देंगे, तब हम इसे विकसित करेंगे। शुरुआत में, इसके पहले परीक्षण को 2021 और फिर 2024 के लिए निर्धारित किया गया था। हालांकि, इसमें अब काफी देरी हो चुकी है। ऐसे में मुझे लगता है कि इसके पहले परीक्षण में पांच या छह साल का समय जरूर लगेगा। उनसे सवाल पूछा गया कि क्या ब्रह्मोस-2 मिसाइल में जिरकॉन की कुछ विशेषताएं होंगी, तो उन्होंने कहा कि ऐसा संभव है।

ब्रह्मोस-2 का नहीं करेंगे निर्यात
अतुल राणे ने बताया कि ब्रह्मोस मिसाइल का हाइपरसोनिक वेरिएंट बहुत महंगा होगा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि हम ब्रह्मोस हाइपरसोनिक संस्करण का निर्यात नहीं कर पाएंगे। इसका उत्पादन केवल रूस और भारत के लिए किया जाएगा। राणे ने समझाया कि भारत मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था का एक सदस्य होने के नाते 300 किमी (186 मील) से अधिक की दूरी और 500 किलोग्राम से अधिक वजन वाली मिसाइल विकसित कर सकता है, लेकिन इसे किसी तीसरे देश को नहीं सौंप सकता।

Latest articles

महिला आरक्षण बिल पास नहीं हुआ, PM बोले- माफी मांगता हूं

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान पीएम...

छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी को 50 लाख की प्रोत्साहन राशि, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने किया सम्मानित

रायपुर। भारत को कबड्डी विश्वकप और एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक दिलाने वाली छत्तीसगढ़...

राजस्थान की बेटियां हर क्षेत्र में बना रही हैं अपनी विशिष्ट पहचान : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश की छात्राओं के साथ वर्चुअल संवाद के माध्यम...

77वें राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने की शिरकत

जयपुर। राजस्थान पुलिस के 77वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह...

More like this

ट्रम्प बोले- इजराइल और लेबनान 10 दिन के सीजफायर पर राजी, आज रात 2:30 बजे से लागू होगा

दोनों देशों से बात कर सहमति बनाई तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा...

इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका वार्ता: लेबनान पर तकरार, तेहरान और अमेरिका अपनी शर्तों पर अड़े!

नई दिल्ली। लगभग छह हफ़्तों तक चले विनाशकारी संघर्ष के बाद अब पूरी दुनिया...