9.5 C
London
Wednesday, February 11, 2026
Homeराष्ट्रीयधर्म परिवर्तन विरोधी कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और 6 राज्यों...

धर्म परिवर्तन विरोधी कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और 6 राज्यों से मांगा जवाब

Published on

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर केंद्र और छह राज्यों से जवाब दाखिल करने को कहा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने कहा है कि राज्यों के हाई कोर्ट में 21 अर्जी पेंडिंग है। इन्हें सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर किया जाए। इन अर्जियों में धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने वाले कानून को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने जमीयत उलेमा ए हिंद की अर्जी पर केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। जमीयत की ओर से अर्जी दाखिल कर गुजरात हाई कोर्ट, इलाहाबाद हाई कोर्ट, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट, झारखंड हाई कोर्ट, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और कर्नाटक हाई कोर्ट में पेंडिंग केस सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की गुहार लगाई है। बता दें, धर्मांतरण विरोधी कानून के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 3 फरवरी को सुनवाई का फैसला किया था। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर देश भर के विभिन्न राज्यों में बनाए गए धर्मांतरण विरोधी कानून को चुनौती दी गई है। साथ ही देश के अलग-अलग राज्यों में इससे संबंधित पेंडिंग केस को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर की गुहार लगाई गई थी।

इससे पहले याचिकाकर्ता एनजीओ की ओर से दलील दी गई थी कि राज्यों ने जो कानून बनाए हैं, उस कारण स्थिति बहुत गंभीर हो गई है। लोग इस कारण शादी नहीं कर सकते। अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि राज्यों के उक्त कानून को राज्य के हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है, ऐसे में उन्हें सुनने दिया जाए। वहीं जमीयत उलेमा ए हिंद की ओर से अर्जी दाखिल कर हाई कोर्ट में पेंडिंग केस सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर की गुहार लगाई गई है। याचिका में कहा गया है कि देश भर के अलग-अलग 6 हाई कोर्ट में कुल 21 अर्जी पेंडिंग है। इन अर्जियों में राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानून को चुनौती दी गई है।

आठ राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानून को दी गई चुनौती
इस मामले में याची के वकील कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस के सामने मामला उठाया था। आठ राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वूमेन ने सुप्रीम कोर्ट में इन कानूनों को चुनौती देते हुए कहा है कि यह निजता और मानव गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में यूपी, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड और झारखंड सरकार के कानून को चुनौती दी गई है।

कानून में महिलाओं को एक कमजोर वर्ग के तौर पर दिखाना आपत्तिजनक
याचिका में कहा गया है कि कानून में लुभाना शब्द को व्यापक कर दिया गया है। इसके तहत विवाह के उद्देश्य को भी भीतर लाया गया है। कानून में महिलाओं को एक कमजोर वर्ग के तौर पर दिखाया जाना आपत्तिजनक है। इस कारण महिलाओं के स्वायत्तता के अधिकार प्रभावित होते हैं। याचिका में कहा गया है कि कानून संविधान के अनुच्छेद-25 के तहत मिले अधिकार को सीमित करता है। साथ ही याचिकाकर्ता ने कहा है कि इन कानूनों के कारण अंतर धार्मिक शादी करने वाले कपल को प्रताड़ित किया जा रहा है।

Latest articles

भाजपा भोपाल जिला कार्यकारिणी का गठन, 37 पदाधिकारियों की घोषणा

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत जी खंडेलवाल की सहमति से...

भोपाल में किन्नर समाज की नई नेतृत्व व्यवस्था —सुरैया नायक ने पांच किन्नरों को सौंपी जिम्मेदारी, विवाद शांत करने की पहल

भोपाल राजधानी भोपाल में किन्नर समाज से जुड़े विवाद के बीच नया मोड़ सामने आया...

भौतिक और सामाजिक विकास का संतुलन है बजट : राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर — ओरिएंटल कॉलेज भोपाल में विकसित भारत बजट पर युवा संवाद

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि...

आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी के सानिध्य में ‘हर माह-एक उपवास’ अभियान — मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कार्यक्रम में शामिल, धर्म और संयम का दिया संदेश

भोपाल आचार्य श्री प्रसन्नसागर जी महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित ‘हर माह-एक उपवास’ अभियान...

More like this

बजट में रक्षा पर ज़ोर, आम आदमी को नहीं मिली बड़ी राहत; चांदी की कीमतों में भारी उतार–चढ़ाव

नई दिल्ली।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आम बजट पेश किया। करीब 85...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में पीएमश्री विद्यालय बन रहे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रतीक

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में पीएमश्री विद्यालय बन रहे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रतीक...