8.1 C
London
Saturday, March 28, 2026
Homeराष्ट्रीयधर्म परिवर्तन विरोधी कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और 6 राज्यों...

धर्म परिवर्तन विरोधी कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और 6 राज्यों से मांगा जवाब

Published on

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर केंद्र और छह राज्यों से जवाब दाखिल करने को कहा है, जिसमें याचिकाकर्ता ने कहा है कि राज्यों के हाई कोर्ट में 21 अर्जी पेंडिंग है। इन्हें सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर किया जाए। इन अर्जियों में धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने वाले कानून को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने जमीयत उलेमा ए हिंद की अर्जी पर केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। जमीयत की ओर से अर्जी दाखिल कर गुजरात हाई कोर्ट, इलाहाबाद हाई कोर्ट, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट, झारखंड हाई कोर्ट, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और कर्नाटक हाई कोर्ट में पेंडिंग केस सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की गुहार लगाई है। बता दें, धर्मांतरण विरोधी कानून के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 3 फरवरी को सुनवाई का फैसला किया था। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर देश भर के विभिन्न राज्यों में बनाए गए धर्मांतरण विरोधी कानून को चुनौती दी गई है। साथ ही देश के अलग-अलग राज्यों में इससे संबंधित पेंडिंग केस को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर की गुहार लगाई गई थी।

इससे पहले याचिकाकर्ता एनजीओ की ओर से दलील दी गई थी कि राज्यों ने जो कानून बनाए हैं, उस कारण स्थिति बहुत गंभीर हो गई है। लोग इस कारण शादी नहीं कर सकते। अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि राज्यों के उक्त कानून को राज्य के हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है, ऐसे में उन्हें सुनने दिया जाए। वहीं जमीयत उलेमा ए हिंद की ओर से अर्जी दाखिल कर हाई कोर्ट में पेंडिंग केस सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर की गुहार लगाई गई है। याचिका में कहा गया है कि देश भर के अलग-अलग 6 हाई कोर्ट में कुल 21 अर्जी पेंडिंग है। इन अर्जियों में राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानून को चुनौती दी गई है।

आठ राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानून को दी गई चुनौती
इस मामले में याची के वकील कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस के सामने मामला उठाया था। आठ राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वूमेन ने सुप्रीम कोर्ट में इन कानूनों को चुनौती देते हुए कहा है कि यह निजता और मानव गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में यूपी, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड और झारखंड सरकार के कानून को चुनौती दी गई है।

कानून में महिलाओं को एक कमजोर वर्ग के तौर पर दिखाना आपत्तिजनक
याचिका में कहा गया है कि कानून में लुभाना शब्द को व्यापक कर दिया गया है। इसके तहत विवाह के उद्देश्य को भी भीतर लाया गया है। कानून में महिलाओं को एक कमजोर वर्ग के तौर पर दिखाया जाना आपत्तिजनक है। इस कारण महिलाओं के स्वायत्तता के अधिकार प्रभावित होते हैं। याचिका में कहा गया है कि कानून संविधान के अनुच्छेद-25 के तहत मिले अधिकार को सीमित करता है। साथ ही याचिकाकर्ता ने कहा है कि इन कानूनों के कारण अंतर धार्मिक शादी करने वाले कपल को प्रताड़ित किया जा रहा है।

Latest articles

दादाजी धाम मंदिर में धूमधाम से मनाया गया श्री राम जन्मोत्सव

भोपाल रायसेन रोड स्थित पटेल नगर के प्रसिद्ध आस्था केंद्र दादाजी धाम मंदिर में शुक्रवार...

गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने महापौर से की सौजन्य भेंट, औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं को लेकर सौंपा ज्ञापन

भोपाल गोविंदपुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (जीआईए) के एक प्रतिनिधिमंडल ने महापौर महोदया से उनके कार्यालय में...

थ्रिफ्ट सोसायटी का बड़ा फैसला: सभी सदस्यों को उपहार में मिलेगा 3-सेट ट्रॉली बैग, संचालक मंडल ने दी मंजूरी

भोपाल थ्रिफ्ट सोसायटी के संचालक मंडल ने सदस्यों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया...

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10 घटी, कीमतों को स्थिर रखने का फैसला

केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में ₹10-₹10 प्रति लीटर की...

More like this

रामनवमी पर प्रदेशभर में धार्मिक आयोजन, मंदिरों में विशेष पूजा और भंडारे

भोपाल रामनवमी के पावन अवसर पर मप्र के विभिन्न शहरों में श्रद्धा और उत्साह के...

राजधानी में दो दिन में छह नाबालिग किशोरियां लापता, पुलिस ने शुरू की तलाश

भोपाल राजधानी में दो दिनों के भीतर शहर के अलग-अलग इलाकों से आधा दर्जन नाबालिग...

दादाजी धाम मंदिर में धूमधाम से मनाया गया श्री राम जन्मोत्सव

भोपाल रायसेन रोड स्थित पटेल नगर के प्रसिद्ध आस्था केंद्र दादाजी धाम मंदिर में शुक्रवार...