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क्‍या इंदिरा गांधी को बेटे संजय ने पार्टी में मारे थे छह थप्‍पड़? पूर्व पीएम ने दिया था इसका जवाब

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नई दिल्‍ली

पूर्व पीएम इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी से जुड़े कई किस्‍से हैं। इनमें से कुछ किस्‍से ऐसे भी हैं जिनकी कभी पुष्टि नहीं हो सकी। ऐसा ही एक किस्‍सा इंदिरा को संजय के थप्‍पड़ मारने से जुड़ा है। बात इमरजेंसी की घोषणा से पहले की है। पुलित्‍जर पुरस्‍कार विजेता लुईस एम सिमंस तब बतौर संवाददाता दिल्‍ली में पोस्‍टेड थे। वह उन दिनों ‘द वॉशिंगटन पोस्‍ट’ के लिए काम करते थे। उनकी एक खबर ने हड़कंप मचा दिया था। खबर यह छपी थी कि संजय गांधी ने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को एक डिनर पार्टी में कई थप्‍पड़ मारे थे। 1977 में बीबीसी के डेविड फ्रॉस्‍ट ने इंदिरा का इंटरव्‍यू लेते हुए इस बारे में उनसे पूछा था। इंदिरा ने इसका जवाब भी दिया था।

संजय इंदिरा के छोटे बेटे थे। बड़े भाई राजीव के उलट वह राजनीति में काफी सक्रिय थे। कहा जाता है कि एक समय इंदिरा के सभी फैसले संजय ही लेने लगे थे। किस्‍सा इमरजेंसी से पहले का है। द वाशिंगटन पोस्‍ट में एक खबर छपी थी। सिमंस ने सूत्रों के हवाले से यह खबर लिखी थी। इसमें दावा किया गया था कि संजय गांधी ने मां इंदिरा को छह थप्‍पड़ मारे थे। एक डिनर पार्टी के दौरान ऐसा हुआ था। यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गई थी। दूसरे विदेशी मीडिया समूहों ने भी इसे खूब चलाया था। हालांकि, इस खबर के सच पर संदेह किया गया। इसकी पुष्टि भी नहीं हो सकी।

इंद‍िरा से इस घटना के बारे में पूछा गया था सवाल
1977 में बीबीसी के डेविड फ्रॉस्‍ट ने एक इंटरव्‍यू में इंदिरा से इस बारे में सवाल पूछा था। इंदिरा ने इसका जवाब भी दिया था। उन्‍होंने कहा था कि अगर उनके पिता होते तो इसे ‘फैनटैस्टिक नॉनसेंस’ बताते। उन्‍हें किसी ने थप्‍पड़ नहीं मारा। जहां तक संजय का सवाल है तो उसने आज तक किसी को थप्‍पड़ नहीं मारा है।

भारत लौटने से राजीव और सोन‍िया से मिले थे सिमंस
सिमंस जब इमरजेंसी के बाद भारत लौटे थे तो उन्‍होंने बताया था कि उनकी मुलाकात राजीव गांधी और सोनिया से डिनर पर हुई। जब किसी ने उस दौरान यह बात बताई कि वही ‘थप्‍पड़ मारने वाली स्‍टोरी’ के लेखक हैं तो राजीव मुस्‍कुरा दिए थे। वहीं, सोनिया थोड़ा गुस्‍से में आ गई थीं। इमरजेंसी के दौरान लुईस भारत छोड़कर चले गए थे।

पत्रकार ने कैसे ब्रेक की इतनी बड़ी खबर?
सिमंस ने बताया था कि उन्‍होंने दो सूत्रों के हवाले से यह खबर दी थी। ये एक-दूसरे को जानते थे। वो इस पार्टी में मौजूद थे। इनमें से एक इमरजेंसी लागू होने से एक दिन पहले उनके घर आया था। उन्‍होंने सिमंस और उनकी पत्‍नी से बातचीत में यह किस्‍सा सुनाया। दूसरे सूत्र ने इस पर मुहर लगाई। यह बात तब खुली जब संजय और इंदिरा के रिश्‍तों पर चर्चा शुरू हुई। सेंसरशिप की वजह से किसी भारतीय अखबार ने इस खबर पर कुछ नहीं लिखा था।

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