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Wednesday, June 10, 2026
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बाइडेन सरकार का वो बिल, जो कानून बना तो आसान होगा अमेरिका का नागरिक बनना

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नई दिल्ली,

अमेरिका की जो बाइडेन सरकार ने नागरिकता को लेकर एक नया बिल पेश किया है. इसमें ग्रीन कार्ड के लिए देशों का कोटा खत्म करने और H-1B वीजा सिस्टम में बदलाव करने का प्रस्ताव है. अगर ये बिल कानून बनता है तो इससे अमेरिका का नागरिक बनना आसान हो जाएगा. गुरुवार को डेमोक्रेट सांसद लिंडा सांचेज ने ये बिल पेश किया. इस बिल का नाम ‘यूएस सिटीजनशिप एक्ट 2023’ है.

लिंडा सांचेज का कहना है कि इस बिल में सभी 1.1 करोड़ अप्रमाणित अप्रवासियों को नागरिकता देने का रोडमैप बनाया गया है. ये बिल निर्वासन के डर के बिना लोगों के लिए पांच साल की नागरिकता का रास्ता खोलता है. इसके अलावा, इस बिल में हर देश के कोटा को खत्म कर रोजगार आधारित इमिग्रेशन सिस्टम में बदलावों का भी प्रस्ताव दिया गया है.

इससे फायदा क्या होगा?
– बिल में प्रावधान है कि अगर कोई अमेरिका में सालों से या फिर दशकों से रह रहा है, तो उसके लिए नागरिकता हासिल करना आसान होगा.
– बिल के मुताबिक, अगर कोई कम से कम पांच साल से अमेरिका में रह रहा होगा और टैक्स चुका रहा होगा तो वो ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई कर सकेगा.
– इसके अलावा, अगर कोई खेती से जुड़े काम में लगा है और कम से कम पांच साल से रह रहा होगा, तो तुरंत ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकेगा. इसमें उसकी पत्नी और बच्चे भी शामिल होंगे.
– बिल में इमिग्रेशन सिस्टम में सुधार का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि परिवारों को एकजुट किया जा सके. ग्रीन कार्ड होल्डर्स के परिवारों के लंबे समय से अटके वीजा एप्लीकेशन को तुरंत क्लियर किया जाएगा. इसके लिए हर देश के कोटे को भी बढ़ाने का प्रस्ताव है.
– ये बिल LGBTQ+ के साथ होने वाले भेदभाव को भी खत्म करता है. सेम सेक्स कपल के मामले में अगर एक भी पार्टनर अमेरिकी नागरिक है तो उसका पार्टनर भी साथ रह सकता है. इसके अलावा बिल में कम से कम एक बच्चे को भी ऑटोमैटिक नागरिकता देने का प्रावधान है, जिसके माता-पिता में से कोई भी एक अमेरिकी नागरिक होगा. ये नियम सेम सेक्स कपल पर भी लागू होगा.

इससे भारतीयों को क्या फायदा?
– अगर ये बिल कानून बनता है तो इससे भारतीयों को भी बहुत फायदा होगा. वो इसलिए क्योंकि अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं.
– विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका में लगभग 45 लाख भारतीय रहते हैं. इनके अलावा हर साल हजारों भारतीय H-1B वीजा लेकर भी अमेरिका जाते हैं.
– बिल में प्रावधान है कि अमेरिका में रहकर कम सैलरी पर काम करने वालों को भी ग्रीन कार्ड हासिल करने में मदद मिलेगी. साथ ही, H-1B वीजा धारकों पर निर्भर लोगों को देश में काम करने की मंजूरी देने में और उनके बच्चों को इस सिस्टम से बाहर रखने से रोकने में मदद मिलेगी.

ग्रीन कार्ड और H-1B वीजा में अंतर क्या?
– ग्रीन कार्डः ये एक तरह से स्थायी निवास कार्ड होता है. ग्रीन कार्ड अमेरिका में अप्रवासियों को जारी किया जाने वाला एक दस्तावेज है, जो इस बात का सबूत है कि उस व्यक्ति को देश में रहने की अनुमति दी गई है. H-1B वीजाः ये गैर-अप्रवासी वीजा है. ये अमेरिकी कंपनियों को विदेशी कामगारों को नियुक्त करने की मंजूरी देता है. जब भी कोई व्यक्ति अमेरिकी कंपनी में नौकरी करता है तो उसे H-1B वीजा जारी किया जाता है.

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