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दुनिया का इकलौता तैरता न्यूक्लियर पावर प्लांट, रूस ने भारत को किया ऑफर

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मॉस्को

यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच रूस ने अपने तैरने वाले न्यूक्लियर पावर प्लांट को भारत समेत मित्र देशों को ऑफर किया है। रूस की सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी रोसाटॉम ने कहा कि वह मित्र देशों के साथ फ्लोटिंग परमाणु ऊर्जा संयंत्र (एफएनपीपी) की अपनी तकनीक साझा करने के लिए तैयार है। इससे दूरदराज के इलाकों में चौबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति की जा सकती है। फ्लोटिंग पावर यूनिट का नाम एक रूसी वैज्ञानिक मिखाइल लोमोनोसोव के नाम पर ‘अकादमिक लोमोनोसोव’ रखा गया है। यह रूस के सबसे उत्तरी शहर पेवेक में स्थित है। इस पावर प्लांट का संचालन रोसाटॉम करती है। पेवेक चुकोटका क्षेत्र में आर्कटिक बंदरगाह शहर है। इस शहर की कुल आबादी 5000 है, जो अपने समृद्ध खनिज भंडार के लिए जाना जाता है। सर्दियों में, इस क्षेत्र में तापमान लगभग -24 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। इस पावर प्लांट का संचालन रोसाटॉम करती है।

दुनिया का पहला तैरता परमाणु ऊर्जा संयंत्र रूस के पास
अकादमिक लोमोनोसोव दुनिया का सबसे उत्तरी परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। इसके निर्माण की शुरुआत सेवेरोडविंस्क में सेवमाश सबमरीन-बिल्डिंग प्लांट में हुई थी। अकादमिक लोमोनोसोव की नींव 15 अप्रैल 2007 को रखी गई थी और शुरुआत में इसे मई 2010 में पूरा करने की योजना बनाई गई थी। आधारशिला रखने के कार्यक्रम में रूस के पहले उप प्रधानमंत्री सर्गेई इवानोव और रोसाटॉम के प्रमुख सर्गेई किरियेंको ने भाग लिया था। अगस्त 2008 में रूसी सरकार ने इस प्लांट के निर्माण को सेवमाश से सेंट पीटर्सबर्ग के बाल्टिक शिपयार्ड में ट्रांसफर कर दिया था। मई 2009 में नए शिपयार्ड में दूसरा कील-बिछाया गया था। अकादमिक लोमोनोसोव को 30 जून 2010 को लॉन्च किया गया था।

पहले सेवेरोडविंस्क के लिए बनाया गया था यह पावर प्लांट
अकादमिक लोमोनोसोव में पहला रिएक्टर मई 2009 में में लगाया गया था, जो OKBM अफ्रीकांतोव की डिजाइन की गई KLT-40S थी। इसका दूसरा रिएक्टर एटमएनर्जीप्रोकेट ने अगस्त 2009 में दिया था। इन दोनों को लगाने का काम अक्टूबर 2013 में पूरा हुआ था। अकादमिक लोमोनोसोव पावर प्लांट को पहले सेवमाश शिपयार्ड और उत्तर पश्चिमी रूस में आर्कान्जेस्क ओब्लास्ट में स्थित शहर सेवेरोडविंस्क को बिजली की आपूर्ति करने के लिए बनाया गया था। बाद में इसे रूस के चुकोटका क्षेत्र में पेवेक में तैनात करने का निर्णय लिया गया। यह न्यूक्लियर पावर प्लांट 28 अप्रैल 2018 को सेंट पीटर्सबर्ग से मरमंस्क के लिए रवाना हुआ। यहां पर इसमें परमाणु ईंधन भरा गया।

22 मई 2020 को चालू हुआ था यह प्लांट
अकादमिक लोमोनोसोव न्यूक्लियर पावर प्लांट 17 मई 2018 को मरमंस्क पहुंचा। अकादमिक लोमोनोसोव पावर स्टेशन को आधिकारिक तौर पर 4 जुलाई 2019 को रूसी राज्य परमाणु ऊर्जा कंपनी को सौंप दिया गया था। इसके बाद आइसब्रेकर शिप डिक्सन के जरिए इसे आर्कटिक महासागर के माध्यम से 5000 किमी दूर खींचकर पहुंचाया गया। 9 सितंबर 2019 को यह पावर प्लांट सुदूर पूर्व क्षेत्र के सुदूर पूर्वी छोर चुकोटका जिले में अपने स्थायी स्थान पर पहुंचा। इसने 19 दिसंबर 2019 को परिचालन शुरू किया। यह पावर प्लांट 22 मई 2020 को संयंत्र पूरी तरह से चालू हुआ। वर्तमान में यह क्षेत्र के कुल बिजली जरूरतों का 20 फीसदी आपूर्ति करता है।

हर तीन साल में बदला जाता है ईंधन
अकादमिक लोमोनोसोव की लंबाई 144 मीटर (472 फीट) और चौड़ाई 30 मीटर (98 फीट) है। इस न्यूक्लियर पावर प्लांट को ऑपरेट करने के लिए 69 लोगों का दल है। इस पावर प्लांट में बिजली उत्पादन के लिए आइसब्रेकर प्रपल्शन रिएक्टर से मिले दो KLT-40S रिएक्टर लगे हैं। ये एक सात 300 मेगावाट की बिजली पैदा करते हैं। इनके रिएक्टरों का ईंधन हर तीन साल में बदला जाता है। इसके लिए समृद्ध यूरेनियम (एलईयू) ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है। अकादमिक लोमोनोसोव कोजेनरेशन प्लांट के रूप में काम कर सकता है, क्योंकि रिएक्टर की बेकार की गर्मी क्लैम्प्ड पाइपलाइनों के माध्यम से 60 मेगावाट तक थर्मल पावर प्रदान कर सकती है

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