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कर्नल राज्यवर्धन की बैचेनी बढ़ाने आशु सिंह सुरपुरा हुए बागी, बोले- जनता से बड़ी कोई पार्टी नहीं

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जयपुर

शहर की झोटवाड़ा विधानसभा सीट से भाजपा से टिकट की दावेदारी करने वाले आशु सिंह सुरपुरा ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो क्या हुआ। वोट तो जनता को देना है। लोकतंत्र में जनता जनार्दन सब कुछ है। जनता से बड़ी कोई पार्टी नहीं होती। शनिवार को झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के सिरसी रोड स्थित केसर बाग मैरिज गार्डन में सुरपुरा ने एक सभा का आयोजन किया। इस सभा में हजारों की संख्या में समर्थक मौजूद रहे। सभा में उमड़ी भीड़ से सुरपुरा ने पूछा कि पार्टी ने टिकट नहीं दिया, क्या किया जाए। इस दौरान भीड़ की तरफ से जोरदार आवाज आई कि आपको चुनाव मैदान में उतरना है। इसके बाद सुरपुरा ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।

10 साल से जनता के बीच सक्रिय, मजबूत दावेदार
आशु सिंह सुरपुरा ने वर्ष 2013 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। उन दिनों उन्हें 18000 से ज्यादा वोट मिले। पहली बार में ही एक नौजवान युवा को इतना समर्थन मिलने के बाद सुरपुरा ने समाज सेवा में निरंतर जुटे रहना शुरू कर दिया। वर्ष 2018 में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा और जनता के बीच हमेशा सक्रिय रहे। पूरे 10 साल की लगातार मेहनत के बाद अब सुरपुरा ने बड़ी मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान किया है। झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में 10 सालों की मेहनत को देखते हुए उन्हें किसी भी तरह से कमजोर माने जाने की भूल नहीं करनी चाहिए।

लगातार सक्रिय रहे पार्टी में लेकिन अरमान पूरे नहीं हुए
सुरपुरा लगातार भाजपा में सक्रिय रहे। पिछले दिनों जब पार्टी ने परिवर्तन संकल्प यात्रा निकाली। तब सुरपुरा ने इस यात्रा में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था। चूंकि झोटवाड़ा में उनके समर्थकों की तादाद काफी ज्यादा है। ऐसे में उन्होंने बीजेपी से टिकट की दावेदारी पेश की। उन्हें विश्वास था कि बीजेपी उन्हें टिकट जरूर देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पार्टी ने जयपुर ग्रामीण से सांसद कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को टिकट दिया। राठौड़ को टिकट देते ही सुरपुरा के अरमानों पर पानी फिर गया। वे इसे सहन नहीं कर पाए और चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।

कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की बढ सकती है मुश्किलें
राजस्थान की सबसे बड़ी विधानसभा सीट झोटवाड़ा है जहां 4 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। जातीय समीकरण की बात करें तो झोटवाड़ा में राजपूत, जाट और यादव समाज के लोगों ज्यादा संख्या में है। बीजेपी द्वारा राज्यवर्धन सिंह को चुनाव मैदान में उतारने से राजपूत समाज के वोटों का बंटवारा होगा। हजारों की संख्या में सुरपुरा के समर्थक राज्यवर्धन सिंह को टिकट दिए जाने के खिलाफ हैं। ऐसे कांग्रेस अगर गैर राजपूत को टिकट देती है तो राज्यवर्धन सिंह को बड़ा नुकसान होना तय है। चूंकि सुरपुरा की फैन फोलोविंग काफी ज्यादा है। लिहाजा वे कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

झोटवाड़ा में मजबूत क्यों है आशु सिंह सुरपुरा
वैसे को सुरपुरा पिछले 14 साल से समाजसेवा में सक्रिय हैं लेकिन पिछले 10 साल से वे एक भावी प्रतिनिधि के रूप में लोगों के बीच रहे। कोरोना काल में उन्हें जरूरतमंद लोगों की सेवा करने का अवसर मिला तो वे आगे बढ़कर काम किया। बड़े कारोबारी होने के कारण आशु सिंह सुरपुरा ने स्वयं के दम पर हजारों परिवारों राशन के किट बांटे। आटे के कट्टों पर लगी सुरपुरा की फोटो को लोग भूल नहीं पा रहे हैं। सैकड़ों परिवारों के आगे रोजगार का संकट आया तो सुरपुरा ने कई परिवारों को स्वरोजगार के लिए आर्थिक मदद की। पिछले दिनों जब लम्पी ने कहर बरपाया। तब आशु सिंह सुरपुरा ने झोटवाड़ा क्षेत्र के प्रत्येक गांव में निशुल्क एंबुलेंस सेवा लगाई। गांव गांव डॉक्टरों की टीमें भेजी और लम्पी से ग्रसित गोवंश को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया। सुरपुरा के इन प्रयासों से उन्होंने लोगों के दिलों में विशेष जगह बनाई।

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