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क्या डोनाल्ड ट्रंप के जीतने पर अमेरिका के दरवाजे मुस्लिमों के लिए बंद हो जाएंगे?

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नई दिल्ली,

अमेरिका में होने जा रहे चुनाव में राष्ट्रपति पद के दावेदार डोनाल्ड ट्रंप लगातार ऐसे एलान कर रहे हैं जो अभी सत्ता में बैठी डेमोक्रेटिक पार्टी से अलग है. हाल में उन्होंने कहा कि अगर वे जीते तो देश में अवैध घुसपैठ पर रोक लगा देंगे. ये वो वादा है, जो अमेरिकियों को लुभा सकता है. यही वजह है कि पोल्स भी अभी से ट्रंप के पक्ष में माहौल दिखाने लगे.

क्या निकलकर आया सर्वे में
इसी महीने सिएना कॉलेज पोल्स और न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक सर्वे किया. इसके नतीजे चौंकाने वाले हैं, जिसके मुताबिक देश के 6 में से 4 स्विंग स्टेट्स में ट्रंप आगे रह सकते हैं. यहां बता दें कि स्विंग स्टेट वो राज्य हैं, जहां रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को समान सपोर्ट मिलता रहा है. सर्वे में ट्रंप भारी पड़ते दिख रहे हैं. 13 और जनमत सर्वेक्षणों में भी मिलते-जुलते नतीजे दिखे. इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि शायद अगला साल ट्रंप का हो.

क्या वादे कर रहे हैं ट्रंप
– अवैध अप्रवासियों के खिलाफ जीरो टॉलेरेंस की नीति अपनाई जाएगी.
– ट्रंप वॉल पर आगे काम होगा ताकि लोग घुसपैठ न कर सकें.
– टैररिज्म को कम करने के लिए सारे जरूरी कदम तुरंत लिए जाएंगे.
– एक खास तरह का ट्रैवल बैन लागू होगा, जो मुस्लिम-बहुत देशों के लिए होगा.
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क्यों हो रहा विरोध
रिपब्लिकन पार्टी के दावेदार ट्रंप के खिलाफ डेमोक्रेटिक पार्टी ही नहीं, बल्कि मानवाधिकार पर काम करने वाली संस्थाएं भी उतर आई हैं. वे हवाला दे रही है कि ट्रंप के ट्रैवल बैन की वजह से मुस्लिम स्टूडेंट्स और परिवारों का भारी नुकसान हुआ. घुसपैठियों को लेकर भी कहा जा रहा है कि पहले के कार्यकाल में ट्रंप की पॉलिसी के चलते परिवार अलग हो गए. अवैध तौर पर आने वालों को ट्रंप ने जेल में डाल दिया था, जब तक कि उनपर आरोप साबित न हो जाए. इसके बाद हुआ ये कि अमेरिका पहुंचने वालों की संख्या कम भी हुई थी.

ट्रंप सत्ता में आए तो क्या बदल सकता है
पूरी दुनिया में फिलहाल चरमपंथ के खिलाफ मुहिम सी चल रही है. सुपरपावर अमेरिका इससे कुछ हद तक दूर है. इसकी एक वजह डेमोक्रेट्स की मौजूदगी है. लेकिन माना जा रहा है कि ट्रंप अगर दोबारा चुने गए तो अमेरिका भी दक्षिणपंथी विचारधारा को पोसने लगेगा. ट्रंप फिलहाल जो वादे कर रहे हैं, उसमें से कई इसी तरफ इशारा करते हैं.

घुसपैठियों की शरणगाह बन चुका अमेरिका तब कठोर नियम बना सकता है. इसका असर वहीं तक नहीं रहेगा, बल्कि फॉरेन पॉलिसी भी काफी हद तक प्रभावित होगी. जैसे अमेरिका से कर्ज लेने वाले या फिर मित्र देश दक्षिणपंथ की तरफ खुलकर आ सकते हैं.

कैसे कर सकेंगे ये सब
अमेरिका में राष्ट्रपति के पास काफी ताकत होती है, लेकिन फॉरेन पॉलिसी के लिए ये भी सीनेट के अप्रूवल पर निर्भर होता है. कयास लगाए जा रहे हैं कि ट्रंप सबसे पहले स्ट्रक्चर में बदलाव करते हुए अपने लोग ला सकते हैं. ग्लोबल संस्थाओं में भी बड़ा बदलाव हो सकता है. पिछले कार्यकाल में ट्रंप ने कई ग्लोबल डील्स को कमजोर करने की कोशिश की थी, जैसे क्लाइमेट चेंज पर पेरिस एग्रीमेंट. मेक अमेरिका ग्रेट अगेन के तहत उन्होंने जयवायु परिवर्तन से खुद को दूर कर लिया ताकि हर तरह से व्यापारिक गोल पाया जा सके.

शांति दूत की तरह भी उभर सकते हैं
एक और बड़ा वादा ट्रंप की तरफ आ रहा है. उनका दावा है कि अगर वे सत्ता में आए तो रूस-यूक्रेन युद्ध को 24 घंटों के भीतर खत्म कर सकेंगे. हो सकता है कि ये समय सीमा थोड़ी ज्यादती हो लेकिन ट्रंप जिस तरह से खुद को पीस कैंडिडेट की तरह दिखाते रहे, बहुत संभव है कि वे युद्ध रोकने में मध्यस्थता करें. फिलहाल इजरायल और हमास की लड़ाई में पड़ोसी देशों के भी चरमपंथी गुट शामिल हो रहे हैं. ट्रंप इजरायल की मदद करते हैं. अगर युद्ध जारी रहा तो देखना होगा कि ट्रंप इसमें क्या रोल अदा करते हैं.

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