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दूध से स्नान और फिर बनती थी खीर, आश्रम में लड़कियों का डांस… भोले बाबा के दोस्त ने किया बड़ा खुलासा

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हाथरस

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई भगदड़ की घटना और 121 मौतों के बाद से सूरजपाल उर्फ नारायण साकार हरि भोले खासी चर्चा में है। 2 जुलाई को मची भगदड़ में मौतों के बाद पुलिस की ओर से घटना की जांच चल रही है। हादसा भोले बाबा के प्रवचन की समाप्ति के बाद भीड़ बेकाबू हो गई। भोले बाबा का नाम भी यूपी पुलिस की ओर से दर्ज कराए गए एफआईआर में भोले बाबा का नाम तक नहीं है। इस मामले में सूरजपाल के दोस्त और यूपी पुलिस में लंबे समय तक काम करने वाले नाजर सिंह का खुलासा सामने आया है। एबीपी न्यूज से बात करते हुए नाजर सिंह ने भोले बाबा को लंबे समय से जानने की बात कही है। उन्होंने कहा कि हमने साथ में नौकरी की थी। उन्होंने दावा किया कि उनके पास पहले भी कोई शक्ति नहीं थी और अभी भी ऐसा कुछ भी नहीं है। नाजर ने कहा कि हम आगरा में साथ में काम करते थे।

भोले बाबा के दोस्त नाजर सिंह ने दावा किया किया कि नौकरी के समय उनका आध्यात्म की तरफ कोई झुकाव नहीं था। नाजर ने खुलासा किया कि उनकी पत्नी ने सबको बताया था कि वह भगवान विष्णु के अवतार हैं। पत्नी के प्रचार का लाभ उन्होंने उठाया। उन्होंने कहा कि बाबा ने नौकरी किस वजह से छोड़ी थी, इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। बाबा के दोस्त ने कहा कि भोले बाबा के बच्चे नहीं थे। इसलिए उन्होंने अपने साले की बच्ची को ही गोद ले लिया था। अचानक उसकी मौत हो गई थी। उस समय प्रचारित किया गया कि भोले बाबा उसे ठीक करेंगे, लेकिन दो दिनों तक पड़ा रहा शव बदबू करने लगा। इसके बाद बच्ची के शव का क्रियाकर्म किया गया था।

लड़कियों के डांस का दावा
नाजर सिंह नेकहा कि भोले बाबा के साले की बेटी उनके साथ ही रहती थी। उसकी मौत के बाद प्रचारित किया गया कि जंतर-मंतर से भोले बाबा उसे ठीक कर देंगे। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। नाजर ने कहा कि एक बार हम बाबा के आश्रम गए थे। वहां देखा कि 30 से 40 लड़कियां नाच रही थी। बाबा ऊपर से देख रहे थे। उनके आश्रम में ज्यादातर महिलाएं ही रहती थी। पुरुष सेवादारों को आश्रम के बाहर ही रखा जाता था। भोले बाबा ने जो तीन सेना बना रखी थी, उसमे भी लड़कियां ही थी। लड़कियों के डांस को लेकर दावा किया गया है कि वह मनोरंजन के लिए इस प्रकार के काम करते थे।

दूध से नहाते थे, बनती थी खीर
नाजर सिंह ने बताया कि भोले बाबा अपने आश्रम में सुख-सुविधाओं के तमाम इंतजाम थे। वह आश्रम में दूध से नहाता था। इसके बाद इसी दूध से खीर बनाई जाती थी। भक्तों में प्रसाद के तौर पर इस खीर को बांटा जाता था। भोले बाबा के बचपन के दोस्त ने कहा कि बाल्यकाल से लेकर नौकरी के दिनों तक आध्यात्म की तरफ रुझान नहीं दिखा था। साले के बेटी की मौत के बाद भोले बाबा बनने की बात सामने आने लगी। बच्ची की मौत सूरजपाल के नौकरी छोड़ने के करीब एक से डेढ़ साल के भीतर हुई थी। उन्होंने कहा कि कमरे में सूरजपाल खुद को भोले बाबा, भगवान विष्णु कहते थे।

भोले बाबा के दोस्त ने कहा कि बाद के समय में वह प्रवचन करने लगा। 100-150 लोग जुट जाते थे। अब कोई मंच पर बैठेगा तो कुछ न कुछ बोलना शुरू ही कर देगा। बाद के समय में उसके चमत्कारों की चर्चा शुरू कर दी गई। भीड़ बढ़ने लगी। इसके बाद लोग इसके प्रवचनों में भीड़ बढ़ती चली गई।

भोले बाबा को सफेद रंग क्यों पसंद है?
कासगंज के बहादुरनगर स्थित भोले बाबा के पहले आश्रम से भी बड़ा खुलासा हुआ है। भोले बाबा के लंबे समय से सेवादार राजपाल सिंह यादव उर्फ खन्ना जी ने कहा कि आश्रम में भोले बाबा सादा जीवन गुजारते हैं। सफेद सूट का सीक्रेट भी उन्होंने बताया। उन्होंने कहा कि सफेद सूट का कोई लॉजिक नहीं है। वह सामान्य कपड़े भी पहनते हैं। उन्होंने कहा कि सफेद सूट को आप सच्चाई से जोड़कर देखिए। झूठ का रंग काला होता है। वहीं, सच का रंग सफेद होता है। उनके बातों में मानवता और सच्चाई का रंग साफ दिखता है। साथ ही राजपाल सिंह यादव ने हाथरस भीड़ में भगदड़ की वजह अराजक तत्वों को बताया।

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