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54 लाख नए खाते खुले, 44 लाख बंद… क्‍या दरकने लगी है सबसे मजबूत दीवार? एक्‍सपर्ट ने कह दी टेंशन वाली बात

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नई दिल्‍ली

बाजार की मौजूदा स्थिति से लोग टेंशन में हैं। गिरावट का दौर खिंचता जा रहा है। आंसिद कैपिटल के मैनेजिंग पार्टनर अनुराग सिंह ने बाजार की मौजूदा स्थिति पर अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि भारत में जो भी बाजार में आना चाहता था, वो पहले ही आ चुका है। नए निवेशकों को ढूंढना मुश्किल है। दिसंबर में 54 लाख नए SIP खाते खुले। वहीं, 44 लाख बंद भी हो गए। निवेशक अनिश्चित दिख रहे हैं। वे अपना पैसा एक फंड से दूसरे फंड में घुमा रहे हैं। पिछले कुछ सालों के प्रदर्शन पर फोकस किया जा रहा है। यह आत्मविश्वास की कमी दर्शाता है। वे सिर्फ पिछले रिटर्न का पीछा कर रहे हैं।

ये 3 पॉइंट समझने जरूरी
अनुराग सिंह ने तीन बड़े पॉइंट्स पर जोर दिया। पहला, वह उन विशेषज्ञों और बाजार के जानकारों पर संदेह करते हैं जो कहते हैं कि 20 साल तक बने रहें, आपको लाभ की गारंटी है। दूसरे ही वाक्‍य में वे यह भी कह देते हैं कि पिछला प्रदर्शन भविष्‍य की गारंटी नहीं है। सिंह का मानना है कि कोई भी यहां कुछ भी गारंटी नहीं दे सकता। भले ही कहा जाए कि 20 साल में यह हमेशा काम करता रहा है, यह सच नहीं है।

दूसरा, भारत में SIP का विश्लेषण अक्सर पिछली घटनाओं के आधार पर किया जाता है। यह भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं देता है। बाजार में 7, 8, 10 साल के लंबे मंदी के दौर थे, बाजार बहुत सस्ते थे। कहा जाता है कि अगर आप उस स्तर पर पैसा लगाते तो जाहिर है कि आज आप बहुत अमीर होते। मुद्दा यह है कि क्या उस समय ऐसे निवेशक नहीं थे जो जानते थे कि बाजार पैसा बढ़ा सकता है? शायद थे। लेकिन, उस समय इसे स्वीकार करना बहुत मुश्किल था।

अंतिम पॉइंट दुनिया भर में आप अमेरिका का उदाहरण लेकर कुछ भी सही ठहरा सकते हैं। अर्थव्यवस्था 60 वर्षों से बहुत अच्छा काम कर रही है। बाजार धूम मचा रहा है। अनुराग सिंह ने कहा कि अभी के लिए अमेरिका को छोड़ दें। कोई और बाजार बताएं जहां यह काम करता हो। यह भारत के अलावा कहीं काम नहीं करता। यहां तक कि वहां भी विशेषज्ञ बेईमान हो रहे हैं। कारण है कि वे 2002 से 2008 की घटनाओं को गिनते हैं। जिस क्षण आप उस चरण को हटा देते हैं, भारत में भी SIP का मामला बहुत कमजोर है। ये सीमित पॉइंट हैं। लेकिन, इस घटना के बारे में बहुत सतर्क रहने की जरूरत है कि यह लंबी अवधि में काम करती है।

क्‍या दरकने लगी है दीवार?
अनुराग सिंह के मुताबिक, दिसंबर में 5.4 मिलियन नए SIP खाते खोले गए, लेकिन 4.4 मिलियन खाते बंद भी कर दिए गए। यह दिखाता है कि निवेशकों को भी यकीन नहीं है। वे पिछले दो साल, तीन साल और यहां तक कि पिछले एक साल को देखते हुए इस फंड से उस फंड में पैसा लगा रहे हैं।

दरअसल, विदेशी संस्‍थागत निवेशकों (एफआईआई) की भारी बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों की लिवाली से बाजार की गिरावट पर कुछ हद तक अंकुश लगा है। बीते कुछ सालों में सिप के जरिये बाजार में घरेलू निवेशकों का पैसा लगा है। इसने बाजार को स्थिरता दी है। लेकिन, बाजार की लगातार गिरावट के बीच अब यही भरोसा डगमगाता दिख रहा है।

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