नई दिल्ली
विपक्ष की ओर से सबसे पहले कांग्रेस सांसद और वक्फ पर जेपीसी के सदस्य नसीर हुसैन ने सरकार पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति को बढ़ावा देकर वोट बैंक की पॉलिटिक्स का आरोप लगाया। उन्होंने जेपीसी में विपक्ष की ना सुनी जाने और एनडीए पक्ष की ओर से दी गई सिफारिशों को देश की जनता पर थोपने का आरोप लगाया। नसीर ने कहा कि पहली बार जेपीसी में नान स्टेकहोल्डर को बुलाया गया और सरकार को जो सुझाव मिले वो पब्लिक करें तो पता चलेगा कि कितने लोगों ने विरोध में सुझाव दिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन पर सरकार की निगाह है, सब जानते हैं कि धारावी में कौड़ियों के भाव जमीन किसे दी गई। नसीर ने कहा कि 2013 में वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन करने के बाद अपना रुख इसलिए बदल लिया क्योंकि 2024 के चुनाव में उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और वह वक्फ कानून के बारे में देश में तमाम तरह की भ्रांतियां फैला रही है।
सरकार संवैधानिक अधिकारों पर हमला कर रही- संजय सिंह
वहीं आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोला, उन्होंने कहा कि सरकार संवैधानिक अधिकारों पर हमला कर रही है। उन्होंने टीवी के एक कॉमेडी शो का जिक्र करते हुए कहा कि जब सरकार ये कहती है कि वो मुसलमानों का भला करने के लिए ऐसा कर रही तो उन्हें कपिल शर्मा शो याद आ जाती है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि संसद के दोनों सदनों में बीजेपी की ओर से सिर्फ एक मुस्लिम सांसद हैं और कोई मुस्लिम मंत्री नहीं है।
संजय सिंह बोले- ये धार्मिक संपत्तियों पर कब्जे की कोशिश है
संजय सिंह ने कहा कि ये धार्मिक संपत्तियों पर कब्जे की कोशिश है और इसे ये अपने उद्योगपतियों को देंगे। उन्होंने कहा कि आज वक्फ की बात हो रही है, लेकिन इसके बाद मंदिर, गुरुद्वारों और चर्चों का नंबर आएगा। हाालंकि इस दौरान उनके बयान को लेकर सदन में बहुत हंगामा हुआ। अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ी इस विवादित टिप्पणी के बाद सत्तापक्ष के लोग विरोध में खड़े हो गए और बयान को सदन की कार्यवाही से हटाने की मांग करते रहे, जिसे चेयर पर बैठे घनश्याम तिवाड़ी ने मान लिया। उन्होंने कहा कि सरकार पिछड़े मुसलमानों का भला करना चाहती है, ऐसे में क्यों ना छुआछूत हटाने के लिए बिल लाया जाना चाहिए, क्यों ना हिंदू धार्मिक संस्थानों में दलितों और पिछड़ों को आरक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने 2020 में सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि ज्यादातर वक्फ संपत्तियां डिजिटाइज हो गई हैं, फिर दोबारा से डॉक्यूमेंट क्यों मांगे जा रहे हैं।
तिरूचि शिवा ने बिल को बताया असंवैधानिक
डीएमके सांसद तिरूचि शिवा ने बिल को पूरी तरह से असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि एक समुदाय को ही निशाने पर लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा ठीक नहीं है और वो कंट्रोल चाहती है। शिवा ने कहा कि सरकार कहती है सबका साथ, सबका विकास लेकिन मुसलमानों में असुरक्षा की भावना क्यों पैदा की जा रही है। उन्होंने पार्टिशन का जिक्र करते हुए कहा कि मुसलमानों ने जिन्ना से कहा था कि यही देश उनका घर है।
तिरूचि शिवा ने क्यों किया सन 47 के अगस्त महीने का जिक्र
शिवा ने सरकार पर देश के सेक्युलर धागे को कमजोर किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश में एक भाषा, एक कल्चर और एक धर्म आधार नहीं हो सकता। जेपीसी का जिक्र करते हुए कहा कि समिति में 248 स्टेकहोल्डर आए थे लेकिन आपने कितनी सिफारिशें मानी। उन्होंने अगस्त 1947 की ईद का जिक्र करते हुए कहा कि देश में सांप्रदायिक दंगों के दौरान भी महात्मा गांधी की अगुवाई में दोनों धर्मों के लोगों ने ईद का त्योहार मनाया, लेकिन मौजूदा वक्त में यूपी में होली के दौरान 200 से ज्यादा मस्जिदें कवर की गई। हरियाणा सरकार ने ईद को बतौर गेजेटेड छुट्टी ईद को लिस्ट से बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा कि बहुमत की ताकत का सरकार गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आंबेडकर और पटेल का जिक्र करते हुए कहा कि देश एक सेक्युलर देश है, ऐसे में माइनोरिटी के खिलाफ ऐसे व्यवहार मत करिए।
टीएमसी बोली- ये बिल मौलिक अधिकारों का हनन
टीएमसी के नदीमुल हक ने कहा कि ये बिल मौलिक अधिकारों का हनन करता है और ये एक कल्चरल वैंडिलिज्म यानि सांस्कृतिक बर्बरता है। हक ने कहा कि इस बिल में संपत्ति के दस्तावेजों पर भी जोर दिया गया है। लेकिन कई संपत्ति पीढ़ियों से हैं और मौखिक आधार पर दिए गए थे, वैसे मामलों में दस्तावेज कैसे उपलब्ध होंगे।उन्होंने दावा किया कि इस विधेयक के प्रावधानों से अदालतों पर भी बोझ बढ़ेगा जहां पहले ही बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं।
YSR कांग्रेस ने किया बिल का विरोध
वहीं YSR कांग्रेस पार्टी के वाई वेंकट सुब्बा रेड्डी ने विधेयक का विरोध करते हुए दावा किया कि यह मुसलमानों के मामलों में हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक न केवल मुसलमानों के बुनियादी अधिकारों के खिलाफ बल्कि समानता के अधिकार के खिलाफ भी है और इसे मुसलमानों की जमात कभी मंजूर नहीं करेगी। CPM के जान ब्रिटॉस ने कहा कि यह विधेयक समानता, लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों से लेकर कई बिंदुओं पर असर डालेगा। उन्होंने कहा कि आप पहले मणिपुर में तो हालात सामान्य कीजिये, बाद में मुसलमानों का कल्याण कीजियेगा ।
जेएमएम ने कहा- सरकार की नीयत पर संदेह
जेएमएम के डॉ सरफराज अहमद ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि सरकार की नीयत पर उन्हें संदेह है। उन्होंने कहा कि हर धर्म के लोगों को अपनी संस्था बनाने और लोगों की खिदमत करने का अधिकार है। वक्फ बोर्ड जबरदस्ती किसी की जमीन नहीं हड़पता जमीन देने वाला अपनी इच्छा से जमीन देता है तब उसे लिया जाता है।
संजय राउत ने जिन्ना का नाम लेकर बीजेपी को घेरा
शिवसेना यूबीटी के संजय राउत ने कहा कि सरकार को मुसलमानों की इतनी चिंता हो रही है कि मोहम्मद अली जिन्ना ने भी इतनी चिंता नहीं की थी। जिन्ना की आत्मा कब्र से आकर आपके शरीर में आ गई। पहले लगता था कि हम सब मिलकर हिंदू राष्ट्र बना रहे हैं, ऐसा लगा आप हिंदू पाकिस्तान बना रहे हो। उन्होंने इसे ट्रंप की ओर से भारत पर 26 पर्सेंट टैरिफ लगाए जाने के कदम से ध्यान हटाने की कवायद बताया।
बीजेडी ने भी बिल का किया विरोध
इसके साथ ही बीजू जनता दल ने बिल का राज्यसभा में विरोध किया। बीजेडी के मुजीबुल्ला खान ने कहा कि साल 2014 में मोदी सरकार जब सत्ता में आई तो सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की बात करते हैं, लेकिन मुसलमानों के मन में अविश्वास क्यों है? उन्होंने कहा कि अगर विसंगतियों को ठीक करना चाहते हैं तो बात करके ठीक किया जा सकता है। हमारे देश में भाईचारा क्यों नहीं हो सकता। लोगों को नमाज पढ़ने से क्यों रोका जा रहा है।
अहंकार से बड़ा कोई दुश्मन नहीं- रामगोपाल यादव
एसपी सांसद रामगोपाल यादव ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि अहंकार से कोई बड़ा दुश्मन नहीं होता। लोगों को सरकार पर विश्वास नहीं है। आरजेडी के मनोज झा ने कहा कि सारे प्रयोग मुस्लिम समुदाय के साथ क्यों किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार मुस्लिम समुदाय के कमजोर लोगों के भले के लिए काम कर रही है तो ऐसे लोग तो हिंदू समुदाय में भी हैं और जातिगत सेंशस के मुद्दे पर क्यों चुप हो जाते हैं।