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आफत की तूफान से सावधान! बिहार-झारखंड-ओडिशा-बंगाल-आंध्र प्रदेश पर खतरा, जानिए अपडेट्स

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पटना

उत्तर भारत में मानसून का दौर खत्म होने के बाद अब तूफान का खतरा बढ़ गया है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में सितरंग नाम के तूफान का खतरा है। परेशानी की बात ये है कि बिहार-झारखंड में धान की फसल लगभग तैयार है। किसानों ने काफी मेहनत और पैसे खर्च कर धान की फसल को तैयार किया है। ऐसे में साइक्लोन उनके लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। मौसमी बारिश के चंगुल से सीधे चक्रवात की चपेट में आने की संभावना है। अंडमान सागर के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण ने आकार लेना शुरू किया, कुछ मौसम विज्ञानी भारत के पूर्वी तट के लिए एक संभावित ‘सुपर साइक्लोन’ के बारे में चेतावनी दिए हैं।

23-27 अक्टूबर के बीच दिखेगा साइक्लोन का असर
हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा कि ये बताना जल्दबाजी होगी कि आखिर में क्या होगा। मगर इतना तो तय है कि ओडिशा, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश में 23-27 अक्टूबर के बीच बहुत भारी बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। आईएमडी ने ताजा निम्न दबाव क्षेत्र (एलपीए) बनने की पुष्टि की। अगले 48 घंटों में बंगाल की पूर्वी खाड़ी और भारतीय तट की ओर मूव करेगा।

बिहार-झारखंड के किसानों पर सितरंग तूफान का साया
बंगाल की खाड़ी में आए साइक्लोन का असर बिहार-झारखंड में दिखता है। तेज हवाओं के साथ बारिश की पूरी संभावना रहती है। ऐसे में बिहार-झारखंड के किसानों को फसल की चिंता सताने लगी है। धान की फसल लगभग तैयार है। ये महीना उसके पकने और कटने का होता है। अगर तूफान का ज्यादा असर दिखा तो फसलों की तबाही तय है।

60-70 किलोमीटर की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
आईएमडी के अनुसार, ये विक्षोभ शनिवार (22 अक्टूबर) तक बंगाल की पश्चिमी खाड़ी के ऊपर एक चक्रवाती तूफान में तेज होने की संभावना है। ग्लोबल फोरकास्ट सिस्टम (जीएफएस) और यूरोपीय ईसीएमडब्ल्यूएफ मॉडल दोनों इस बात से सहमत हैं कि तूफान उत्तर की ओर अधिक ट्रैक करेगा। 60-70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार रहेगी। अगले सप्ताह मंगलवार तक ओडिशा-पश्चिम बंगाल सीमा के पास लैंडफॉल बनाएगा।

WMO ने तूफान का नाम दिया है सितरंग
मंगलवार रात (25 अक्टूबर) तक पश्चिम बंगाल की सीमा से टकराने से पहले अनुमानित ताकत घटकर सिर्फ 65 किमी प्रति घंटे रह जाएगी। अगर तूफान तेज होकर चक्रवात में बदल जाता है, तो इसका नाम सितरंग होगा। ये नाम उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नामकरण के लिए विश्व मौसम विज्ञान विभाग (WMO) के दिशानिर्देशों के अनुरूप थाईलैंड के एक सुझाव पर आधारित है।

चक्रवात के तेज होने की संभावना से इंकार नहीं
आईएमडी के प्रमुख मृत्युंजय महापात्रा ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि ‘आईएमडी का विस्तारित रेंज पूर्वानुमान 21 अक्टूबर के बाद एक संभावित चक्रवात के डिप्रेशन में विकसित होने की ओर इशारा करता है। हम इस प्रणाली के चक्रवात में तेज होने की संभावना से इंकार नहीं कर रहे हैं। लेकिन ये कहना जल्दबाजी होगी कि यह कितना तेज होगा, क्योंकि परिसंचरण (Circulation) अभी तक आकार नहीं लिया है।

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