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Wednesday, April 29, 2026
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सम्राट चौधरी ने सवर्ण वोट बैंक पर मार दी कुल्हाड़ी! ‘मुरेठा मैन’ का नया दांव कहीं पड़ न जाए उल्टा

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पटना

बिहार के ‘मुरेठा मैन’ के नाम से मशहूर उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नया दांव चलने की कोशिश की है। दरअसल 20 जून 2024 को बिहार सरकार के 65 फीसदी आरक्षण वाले फैसले को पटना हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया। इस आदेश के बाद बिहार सरकार का बनाया गया बिल औंधे मुंह जा गिरा। ये अलग बात है कि बिहार विधानमंडल से जब ये बिल पारित होकर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के पास गया तब बिहार में नीतीश-तेजस्वी की सरकार थी। अब फैसले को रद्द किए जाने के बाद डेप्युटी सीएम सम्राट चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। लेकिन कहीं उनका ये सियासी दांव उल्टा न पड़ जाए, समझिए कैसे…

‘सुप्रीम कोर्ट का पिछला फैसला बेहद ही ऐतिहासिक’
बिहार के मशहूर शिक्षाविद् और पॉलिटिकल एक्सपर्ट डॉक्टर संजय कुमार के मुताबिक ‘चुंकि इंदिरा साहनी केस में 1992 में सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट एक लैंडमार्क जजमेंट है कि हम आरक्षण का कोटा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं बढ़ा सकते हैं। मराठा आरक्षण पर भी सुप्रीम कोर्ट का भी यही रुख था। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के जजमेंट के बाद सुप्रीम कोर्ट में जाने का अधिकार तो है, लेकिन एक बार सुप्रीम कोर्ट जो फैसला लेती है, आगे जाकर भी उससे पीछे नहीं हटती है।’

‘सवर्ण वोटर जाति को नहीं बल्कि एक धारा को समर्थन देते हैं’
डॉक्टर संजय आगे कहते हैं कि ‘जहां तक रही सवर्ण वोट बैंक की बात तो ये विचारधारा के आधार पर पार्टियों को मिलती रही है, न कि जातीय गुणा-भाग के आधार पर। जब अदालतों को पूरा देश पूजता है, वहां पर उनके निर्णय पर सवाल उठाना कहीं से भी उचित नहीं माना जाएगा। वोटरों की नजर में भी इसका खराब असर ही पड़ेगा। एक बात फिर से जान लीजिए कि सवर्ण वोटर शुरू से सिद्धातों की राजनीति करते आया है और अगर अगर समर्थन दिया है तो विचारधारा को, न कि जात-पात को।’

सम्राट चौधरी पहले बड़े मिशन में रहे फेल
डॉक्टर संजय कुमार की बातों को आपने सुन लिया। अब सुनिए हमारे उस सूत्र की बात जो सियासी गलियारे से लगातार जुड़े रहे हैं। NDA के नेता भी हैं। उनका साफ कहना है कि बीजेपी ने सवर्ण और दलित-OBC को साधने के लिए ही एक सवर्ण भूमिहार (विजय कुमार सिन्हा) और एक OBC (सम्राट चौधरी) को उपमुख्यमंत्री बनाया। मकसद ये था कि पार्टी के वोट बैंक में बैलेंस बना रहे। सवर्ण वोटर आरक्षण को लेकर ही नाराज दिखे और इसका असर बीजेपी को औरंगाबाद, पाटलिपुत्र और आरा जैसी सीटों पर साफ दिख गया। वहीं इसी सूत्र ने हमें बताया कि सम्राट चौधरी को जिस मकसद से पार्टी में बड़ी जगह दी गई थी, उसमें वो फेल रहे। इसकी बानगी ये कि काराकाट में वो अपने समाज के वोट उपेंद्र कुशवाहा को ट्रांसफर करा ही नहीं पाए।

अब सवाल ये कि असर क्या होगा?
अब इस सवाल को ऐसे समझिए कि मुजफ्फरपुर के कुढ़नी में सवर्ण वोटरों ने उपचुनाव में बीजेपी को पानी पिला दिया। तब जाकर दिल्ली तक इसकी तपिश महसूस की गई। लंबा मंथन चला। नहीं तो विजय कुमार सिन्हा को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की दूसरी कोई वजह समझ नहीं आती। लेकिन सम्राट चौधरी के साथ एक दिक्कत यही है कि वो बगैर पार्टी में बाकी नेताओं से राय बनाए बगैर फ्रंटफुट पर खेल जाते हैं। कुछ जगहों पर उन्हें फायदा मिलता तो है लेकिन ज्यादातर जगहों पर उन्हें नुकसान हो जाता है। लोकसभा चुनाव 2024 इसका गवाह भी बन चुका है। ऐसे में कहीं सवर्ण वोटर सम्राट के चलते बीजेपी से भड़के तो 2025 का विधानसभा चुनाव तो अभी बाकी ही है।

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