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बहने लगे थे आंसू, कंपने लगी थी आवाज… ऐसी थी जेल में नलिनी श्रीहरन और प्रियंका गांधी की वह मुलाकात

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चेन्नै

राजीव गांधी हत्या केस में रिहा हुईं नलिनी श्रीहरन ने रविवार को पत्रकारों से बात की। इस दौरान उन्होंने 2008 में उनके और प्रियंका गांधी के बीच हुई मुलाकात में हुई चर्चा का जिक्र किया। नलिनी ने बताया कि प्रियंका गांधी ने उनसे जेल में मुलाकात की थी। इस दौरान अपने पिता की हत्या के बारे में पूछा था। बातचीत के दौरान प्रियंका भावुक हो गईं और रो पड़ीं थीं। नलिनी ने कहा कि वह जो कुछ भी जानती थी, उसके बारे में उन्हें बता दिया था। उन्होंने कहा कि मुलाकात में हुई अन्य बातों का खुलासा नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह प्रियंका के निजी विचारों से संबंधित है। नलिनी को 12 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रिहा कर दिया गया था।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या को लेकर पूछे गए सवाल पर नलिनी ने कहा कि उन्हें जितना पता था सब सामने है। उन्होंने कहा कि प्रियंका ने भी जब उसने सवाल किया था तो वह जो कुछ भी जानती थी, उसके बारे में प्रियंका को बता दिया था।

आते समय दिखीं मजबूत
नलिनी ने बताया कि 2008 में प्रियंका गांधी तमिलनाडु के वेल्लोर केंद्रीय कारागार उनसे मिलने आई थीं। जब वह जेल के अंदर आईं तो बहुत मजबूत दिख रही थीं लेकिन जब उनसे बात करने लगीं तो भावुक हो गईं, वह अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर सकीं और रो पड़ी थीं।

रो पड़ी थीं प्रियंका गांधी
नलिनी ने कहा कि समय बीतने के बावजूद, अपने पिता की हत्या के कारण प्रियंका को मिले घाव उस मुलाकात में भी ठीक नहीं हुए थे। दोबारा यह पूछे जाने पर कि क्या प्रियंका रो पड़ी थीं, नलिनी ने कहा हां, वह रो पड़ी थीं।

‘कई बातों का नहीं कर सकती खुलासा’
राजीव गांधी की 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती विस्फोट में हत्या कर दी गई थी। नलिनी ने कहा कि मुलाकात में हुई अन्य बातों का खुलासा नहीं किया जा सकता क्योंकि यह प्रियंका के निजी विचारों से संबंधित है। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें गांधी परिवार के सदस्यों से मिलने में कोई झिझक रही है, नलिनी ने कहा कि हत्याकांड की पृष्ठभूमि के चलते इस तरह की झिझक रही है। हालांकि अगर गांधी परिवार के लोग उससे मिलना चाहेंगे तो वह उनसे मिलेगीं।

लंदन में रह रही बेटी से करेंगी मुलाकात
जेल में 30 से अधिक वर्षों में सीखे गए पाठ के बारे में पूछे जाने पर नलिनी ने कहा कि जेल एक बड़ा विश्वविद्यालय है जहां उसने बहुत सी चीजें सीखी हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या जेल में जीवन और सुरक्षित रिहाई के लिए कानूनी संघर्ष पर आत्मकथा जैसी किताब लिखने की उसकी कोई योजना है, उसने कहा कि उसका ध्यान केवल अपने पति श्रीहरन और लंदन में रह रही अपनी बेटी के साथ रहने पर है।

सुप्रीम कोर्ट ने 1999 में नलिनी, उसके पति श्रीहरन और दो अन्य को मौत की सजा दी थी। तमिलनाडु सरकार ने 2000 में नलिनी की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था। नलिनी और श्रीहरन शीर्ष अदालत के आदेश के बाद 12 नवंबर को रिहा हुए छह दोषियों में शामिल हैं।

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