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डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ बम के बावजूद चढ़ गया चीन का बाजार, जानिए कहां से मिली संजीवनी

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नई दिल्ली

दुनिया की दो सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देशों अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर बढ़ता जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 54 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी जिसे फिर बढ़ाकर 104% कर दिया गया था। इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी सामान पर टैरिफ बढ़ाकर 84 फीसदी कर दिया था। ट्रंप ने अब चीनी सामान पर टैरिफ बढ़ाकर 125% कर दिया है। हालांकि उन्होंने बाकी देशों को रेसिप्रोकल टैरिफ पर 90 दिन की मोहलत दे दी है। इससे अमेरिका के शेयर बाजारों में बुधवार को ऐतिहासिक तेजी आई। इसका असर आज एशियाई बाजारों पर भी दिख रहा है। जापान का निक्केई बाजार खुलते ही 10 फीसदी उछल गया। इसी तरह दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर के शेयर बाजारों में तेजी का माहौल है। लेकिन टैरिफ बढ़ने के बाद भी चीनी बाजारों में तेजी दिख रही है। भारत में शेयर बाजार महावीर जयंती के कारण बंद हैं।

ट्रंप की चीनी सामान पर 125 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा के बावजूद चीन के शेयर बाजारों में तेजी आई है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि सरकारी कंपनियां बाजारों में स्थिरता लाने के लिए इक्विटी में अपना निवेश बढ़ा रही हैं। चीन के सेंट्रल बैंक ने हाल में कहा कि वह सरकारी कंपनी सेंट्रल हुइजिन इनवेस्टमेंट को इंडेक्स फंड्स में होल्डिंग्स बढ़ाने के लिए सपोर्ट कर रहा है और अगर जरूरत पड़ी तो वह री-लेंडिंग सपोर्ट भी देगा। गुरुवार को ब्लू-चिप Shanghai Shenzhen CSI 300 में 1.2% की तेजी आई जबकि Shanghai Composite भी 1% उछल गया। हॉन्ग कॉन्ग का Hang Seng भी करीब 3% तेजी के साथ ट्रेड कर रहा था।

चीन के लिए अमेरिका की अहमियत
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आंकड़ों के मुताबिक मार्च में चीन में महंगाई में अनुमान से ज्यादा गिरावट आई जो इस बात का संकेत है कि अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर गहराने के बीच घरेलू खर्च पर दबाव है। प्रॉड्यूसर प्राइसेज में भी मार्च में गिरावट देखने को मिली है। चीन के लिए अमेरिका सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है जबकि अमेरिका के लिए चीन उसका दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है। चीनी सामान पर टैरिफ बढ़ने से अमेरिका में महंगाई बढ़ने और मंदी आने का खतरा मंडरा रहा है। यही कारण है कि हाल के दिनों में दुनियाभर के शेयर बाजारों में काफी गिरावट आई है।

 

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