भोपाल। राजधानी की लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब का जलस्तर भीषण गर्मी और मानसून की अनिश्चितता के कारण तेजी से कम हो रहा है. शहर की लगभग 40 प्रतिशत आबादी की प्यास बुझाने वाले इस प्रमुख जलस्रोत का स्तर गिरना नगर निगम और शहरवासियों के लिए चिंता का विषय बन गया है. जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, तालाब का पानी उसी तेजी से नीचे जा रहा है, जिससे मई की शुरुआत में ही जल संकट की आहट सुनाई देने लगी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून समय पर नहीं आया, तो आने वाले महीनों में पेयजल की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
नगर निगम के सहायक यंत्री अजय सोलंकी के अनुसार, जलस्तर गिरने के पीछे प्राकृतिक और मानवीय दोनों ही कारण जिम्मेदार हैं. तेज गर्मी के कारण पानी का वाष्पीकरण बहुत तेजी से हो रहा है, साथ ही पिछले मानसून में औसत से कम बारिश होना भी एक बड़ी वजह रही है. तालाब का फुल टैंक लेवल 1666.80 फीट है, लेकिन मार्च 2024 तक यह घटकर 1661.50 फीट रह गया था। वर्तमान में जलस्तर 1661.10 फीट के आसपास पहुँच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है।
बढ़ती जल समस्या को देखते हुए नगर निगम प्रशासन सतर्क हो गया है और प्रतिदिन जलस्तर की मॉनीटरिंग की जा रही है. वर्तमान में शहर की जलापूर्ति के लिए बड़े तालाब के अलावा नर्मदा जल का भी सहारा लिया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि प्रतिदिन लगभग 25 एमजीडी पानी बड़े तालाब से लिया जा रहा है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के लिए अभी से ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में भोपाल को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ सकता है.
