भोपाल
गैस त्रासदी के सबसे गंभीर पीड़ित एक बार फिर सरकारी उदासीनता का शिकार हो गए हैं। केंद्र सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा समय पर बजट जारी नहीं किए जाने के कारण कैंसर और किडनी फेल्योर जैसी जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे 160 गैस पीड़ितों को नवंबर, 2025 से अब तक उनकी अनुग्रह राशि नहीं मिल पाई है।
परिजन काट रहे चक्कर: गैस पीड़ितों के वेलफेयर कमिश्नर कार्यालय के पास यह बताने के लिए कोई ठोस टाइमलाइन नहीं है कि राशि कब तक जारी होगी। पीड़ित और उनके परिजन रोजाना दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। इलाज महंगा, मदद शून्य: पीड़ित संगठनों का कहना है कि अधिकांश गैस पीड़ित बेहद गरीब तबके से आते हैं। इलाज के खर्च ने उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह तोड़ दी है।
कई परिवार कर्ज में डूब चुके हैं, तो कुछ को इलाज बीच में ही छोड़ना पड़ रहा है। मंत्रालय को चिट्ठी, त्वरित कार्रवाई की मांग: संगठनों ने रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर तत्काल बजट जारी करने की मांग की है। वर्ष 2010 में लिया गया था दो लाख रुपये की सहायता देने का फैसला: वर्ष 2010 में गठित ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने यह निर्णय लिया था कि गंभीर बीमारियों से पीड़ित गैस पीड़ितों को दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। आंदोलन की चेतावनी: गैस पीड़ित संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बजट जारी नहीं किया गया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
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