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पाकिस्तानी पीएम का भाषण कमजोर… भारत पर निशाना नहीं साधा तो अपने घर में घिरे शहबाज

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इस्लामाबाद

पाकिस्तान में एससीओ शिखर सम्मेलन हो रहा है। इस समिट में शामिल होन के लिए भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर इस्लामाबाद पहुंचे हैं। बुधवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने औपचारिक रूप से डॉ. जयशंकर से हाथ मिलाकर एससीओ समिट में स्वागत किया। एससीओ समिट में बोलते हुए शहबाज ने चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) के विस्तार और अफगानिस्तान की ओर से होने वाले आतंकवाद का मुद्दा उठाया। डॉ. जयशंकर ने भी आतंकवाद की बात कही। पाकिस्तानी पत्रकारों का मानना है कि दोनों देशों ने एक दूसरे पर निशाना साधने के लिए समिट के मंच का इस्तेमाल नहीं किया। वहीं कई शहबाज के भाषण को कमजोर मान रहे हैं।

शहबाज शरीफ ने आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए अफगानिस्तान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल कम्युनिटी यह सुनिश्चित करे कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल उसके पड़ोसियों के खिलाफ आतंकवाद के लिए न हो। डॉ. जयशंकर ने कहा कि एससीओ चार्टर के मुताबिक आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद तीन प्रमुख चुनौतियां हैं, जिनसे निपटने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा, ‘हमें इनके खिलाफ सख्ती से खड़ा होना, सीमाओं के पार से अगर आतंकवाद, कट्टरवाद, और अलगाववाद जैसी गतिविधियां होंती हैं तो ये व्यापार ऊर्जा के आदान-प्रदान, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा नहीं दे सकतीं।’

शहबाज का भाषण कमजोर?
पाकिस्तान में कई लोगों का मानना है कि शहबाज को अपने भाषण में भारत पर निशाना साधना चाहिए था। क्योंकि उन्होंने ऐसा नहीं किया इसलिए उनका भाषण कमजोर रहा। पाकिस्तानी पत्रकार बकीर सज्जाद ने कहा, ‘पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए भारत की भूमिका का उल्लेख नहीं किया गया। हालांकि अन्य लोगों ने परोक्ष तरीके से ही लेकिन अपनी चिंता के मुद्दे उठाए। पीएम का कमजोर भाषण।’

एक दूसरे पर नहीं साधा निशाना
पाकिस्तानी पत्रकार गुलाम अब्बास शाह ने मीटिंग को लेकर कहा, ‘भारत और पाकिस्तान दोनों एक दूसरे पर परोक्ष रूप से कटाक्ष करने से बचते रहे। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने भारत का नाम लिए बिना अफगानिस्तान से सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया। भारतीय विदेश मंत्री ने आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद को संबोधित करते हुए सीमा पार आतंका का मुद्दा दोहराया।’ पाकिस्तानी पत्रकार अनस मलिक ने कहा, ‘पाकिस्तान में इस्लामाबाद और नई दिल्ली दोनों ने अपने राष्ट्रीय बयानों में मंच के जरिए एक-दूसरे पर अप्रत्यक्ष कटाक्ष करने से परहेज किया है। तनावपूर्ण संबंधों के बीच एक स्वागत योग्य संकेत।’

 

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