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क्या सजा-ए-मौत के लिए बदल जाएगा फांसी का विकल्प? सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा- समीक्षा के लिए कमिटी पर विचार

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नई दिल्ली

मौत की सजा के लिए फांसी के अलावा विकल्पों की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने मंगलवार को बड़ा वायदा किया है। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि मौत की सजा के लिए मौजूदा तरीकों की समीक्षा के लिए एक एक्सपर्ट कमिटी पर विचार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट अब गर्मी की छुट्टी के बाद जुलाई के दूसरे सप्ताह में इस मामले की सुनवाई कर सकता है।

CJI जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी के इस दलील को गौर से सुना और अगली सुनवाई की तारीख तय की। अटॉर्नी जनरल वेंकटरमानी ने कहा कि केंद्र की ओर से इस बारे में प्रस्तावित पैनल के लिए नामों को तय किए जाने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। केंद्र कुछ समय बाद वह इस बारे में और ज्यादा जानकारी दे पाने में सक्षम होगा।

साल 2017 में दायर की गई थी याचिका
सुप्रीम कोर्ट में साल 2017 में ऋषि मल्होत्रा नाम के एक वकील ने जनहित याचिका दायर कर फांसी देने की जगह मौत के लिए किसी कम दर्दनाक तरीके पर विचार किया जाने की मांग की थी। केंद्र ने साल 2018 में इस मामले में फांसी की सजा को बेहतर तरीका करार दिया था। वहीं, इस साल 21 मार्च को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने कहा था कि वह मौत की सजा दिए जाने के लिए फांसी के अलावा विकल्पों पर विचार कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में केंद्र को नोटिस जारी कर मौत की सजा के अलग-अलग तरीकों पर 2 मई को बेहतर साइंटिफिक डेटा देने की मांग की थी।

याचिकाकर्ता ने दिया अमेरिका में मौत की सजा का हवाला
याचिकाकर्ता ने मौत की सजा के लिए फांसी को क्रूर तरीका बताते हुए कहा था कि उसकी जगह जहर का इंजेक्शन देने जैसे किसी और तरीके को अपनाने पर विचार किया जाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल के जवाब के बाद याचिका दायर करने वाले वकील ने जजों को बताया कि अमेरिका के 50 राज्यों में 35 में मौत की सजा के लिए जहर का इंजेक्शन देने का कानून है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की बेंच ने भी बहुमत से इसे सही तरीका माना है।

फांसी की सजा को लेकर कानून में अब तक क्या हुआ
साल 1983 में दीना बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फांसी को सही तरीका बताया था। वहीं, साल 1996 में सुप्रीम कोर्ट ने ही ज्ञान कौर बनाम पंजाब मामले में शांति और सम्मान से मरने को भी जीवन के अधिकार का हिस्सा माना था। कोर्ट ने कहा था कि फांसी की सजा में इसका उल्लंघन होता है। इसके अलावा लॉ कमीशन भी अपनी रिपोर्ट में फांसी पर लटकाए रखने की सजा का प्रावधान CrPC की धारा 354(5) में संशोधन की सिफारिश कर चुका है।

 

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