7.1 C
London
Monday, April 27, 2026
Homeराज्यमॉर्डन जमाने में देसी बारात, बैलगाड़ी पर सवार दूल्हे को देखते रह...

मॉर्डन जमाने में देसी बारात, बैलगाड़ी पर सवार दूल्हे को देखते रह गए लोग

Published on

कांकेर,

छत्तीसगढ़ के कांकेर में देसी अंदाज में दूल्हा बारात लेकर निकला. अपनी दुल्हनियां को लेने के लिए बैलगाड़ी पर सवार होकर जब दूल्हा निकला, तो हर कोई उसे निहारने लगा. चांदी के आभूषण के साथ धोती, कमीज और पारंपरिक वेशभूषा में सजे दूल्हे ने कहा कि उसने अपनी परंपरा निभाई है. देसी अंदाज में निकली इस बारात की लोगों ने जमकर सराहना की.

दूल्हा बने शंभुनाथ सलाम बड़गांव सर्कल के क्षेत्रीय गोंडवाना समाज के अध्यक्ष हैं. जानकारी के मुताबिक, दोपहर एक बजे पिपली से निकली बारात शाम चार बजे करकापाल पहुंची. इस दौरान रास्ते से गुजर रही बारात को लोग अपने दरवाजे, खिड़की और छतों पर खड़े होकर देखते रहे. साथ ही लोगों की फोटो और सेल्फी लेने की होड़ लग गई.

छत्तीसगढ़ी संस्कृति को संरक्षित रखने का प्रयास
मॉर्डन जमाने में देसी अंदाज की बारात को देखकर बुजुर्गों ने पुराने समय को याद किया. इस प्राचीन परंपरा को देख कर लोग बहुत खुश नजर आ रहे थे. बेहद सादगी भरी इस परंपरा को खर्चीली शादियों से बचने के लिए एक मिसाल के तौर पर जानी जाएगी. छत्तीसगढ़ी संस्कृति को संरक्षित रखने के इस प्रयास में शादी के दौरान सर्व समाज के पदाधिकारियों की भी मौजूदगी रही.

आने वाली पीढ़ी को करेगी प्रेरित
इस शादी में सियाराम पुड़ो, गजेंद्र उसेंडी, नरेश कुमेटी, बलि वड्डे समेत तमाम समाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे. सिया राम पुड़ो ने कहा कि शंभुनाथ का यह प्रयास आने वाली पीढ़ी को सामाजिक दिशा की ओर रुख करने का बेहतर तरीका है. उन्हें गर्व है कि आज के युवा पीढ़ी के लोग अपने संस्कृति और परंपराओं को न भूलते हुए उन्हें संरक्षित रखने के साथ आने वाली पीढ़ी को प्रेरित भी कर रहे हैं.

सामाजिक पदाधिकारी होने के नाते कर्तव्य निभाया- दूल्हा
दूल्हे शंभुनाथ ने कहा कि आधुनिक के इस युग में प्राचीन और हमारी छत्तीसगढ़ी परंपरा विलुप्त होती जा रही है. इसे संजोकर और संरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है. सामाजिक पदाधिकारी होने के नाते मैंने अपना कर्तव्य निभाया है. आने वाले पीढ़ी के लोग भी आधुनिकीकरण से हटकर अपनी परंपराओं और रीति रिवाजों के अनुसरण करें और अपनी परंपराओं को न भूलें.

खर्चीली शादियों से बचने के लिए बनेगी मिसाल- किसान
बैलगाड़ी देने वाले किसानों ने बताया कि उन्हें भी बेहद खुशी हुई कि उनकी बैलगाड़ी खेती करने के काम के साथ छत्तीसगढ़ी संस्कृति को पुनर्जन्म दिलाने के एक प्रयास में कामगार साबित हुई है. बेहद सादगी भरी इस परंपरा की ओर लौटने की यह पहल आदिवासियों को निश्चित ही अपनी परंपरा की ओर लौटने के लिए प्रेरित करेगी. साथ ही आज की खर्चीली शादियों से बचने के लिए एक मिसाल के तौर पर जानी जाएगी.

Latest articles

महिला आरक्षण के समर्थन में कांग्रेस का पैदल मार्च: भोपाल में निकाली रैली, जीतू पटवारी बोले- विधानसभा में करेंगे महिला आरक्षण की मांग

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में महिला आरक्षण के मुद्दे पर सियासी संग्राम तेज...

भोपाल के अन्ना नगर गार्बेज स्टेशन में भीषण आग: 25 टन कचरा और रिसाइक्लिंग सामग्री खाक

भोपाल। राजधानी के अन्ना नगर स्थित गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन में शनिवार देर रात लगी...

ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर भोपाल पुलिस सख्त: अप्रैल माह में वसूला 11 लाख से अधिक का जुर्माना

भोपाल। राजधानी की सड़कों पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के...

भोपाल में भीषण गर्मी का कहर: नर्सरी से 8वीं तक के स्कूलों में 30 अप्रैल तक छुट्टी

भोपाल। राजधानी भोपाल में सूर्यदेव के तल्ख तेवरों और लगातार बढ़ रहे तापमान ने...

More like this

मुख्यमंत्री साय ने हज यात्रियों को सौंपे ‘फर्स्ट एड किट’, कहा- प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए करें दुआ

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को राजधानी रायपुर के मेडिकल...

सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनुभव की अमूल्य धरोहर, युवा पीढ़ी इनसे सीखे: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपुर। एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज और राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (राल्सा) के संयुक्त...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को दी विदाई

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को जयपुर के स्टेट हैंगर पर उपराष्ट्रपति सी.पी....