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Wednesday, April 22, 2026
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कनाडा के पास निज्जर मामले में कोई सबूत नहीं, भारत ने फिर दोहराया; अमेरिकी इनपुट पर बनाया पैनल

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नई दिल्ली

अमेरिका और भारत के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ रहा है। इसी के तहत अमेरिका द्वारा साझा की गई जानकारी की जांच के लिए भारत ने एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। यह जानकारी संगठित अपराधियों, हथियार तस्करों, आतंकवादियों और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले अन्य लोगों के गठजोड़ से संबंधित है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने इस बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिका के साथ मौजूदा सुरक्षा सहयोग के तहत उठाया गया है।

कनाडा और भारत के बीच तनाव जारी
कनाडा और भारत के बीच तनाव पिछले साल सितंबर से बढ़ा हुआ है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि भारत सरकार के एजेंट कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल थे। भारत ने इन आरोपों को प्रेरित और बेतुका बताकर खारिज कर दिया था। हाल ही में ट्रूडो ने भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा को एक जांच में पर्सन ऑफ इंटरेस्ट बताया था, हालांकि उन्होंने मामले का नाम नहीं बताया। पर्सन ऑफ इंटरेस्ट का मतलब एक संदिग्ध व्यक्ति होता है जिसे गिरफ्तार नहीं किया गया है।

कनाडा सरकार ने नहीं दिया कोई सबूत
विदेश मंत्रालय ने कहा कि कनाडा सरकार ने बार-बार अनुरोध के बावजूद निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता का कोई सबूत साझा नहीं किया। मंत्रालय ने ट्रूडो पर वोट बैंक की राजनीति करने और कनाडा में अलगाववादी तत्वों से निपटने के लिए पर्याप्त प्रयास न करने का आरोप लगाया। 11 अक्टूबर को लाओस में ईस्ट एशिया शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रूडो की एक छोटी मुलाकात हुई थी।

अमेरिका को भारत ने दिया जवाब
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा था, ‘हम चाहते हैं कि भारत सरकार कनाडा के साथ उसकी जांच में सहयोग करे… हमने स्पष्ट कर दिया है कि आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।’ इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, सिंह ने एक बयान में कहा, ‘सरकार अमेरिका और कनाडा में कथित कृत्यों या इरादे में भारतीय नागरिकों की संलिप्तता के आरोपों से अवगत है। जहां तक कनाडा का सवाल है, उसने अपने द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया है।’

बाद में ट्रूडो ने स्वीकार किया कि निज्जर की हत्या के संबंध में भारत को कोई ठोस सबूत नहीं दिया था। यह पूरा मामला भारत और कनाडा के रिश्तों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। देखना होगा कि आगे दोनों देशों के बीच संबंध कैसे सुधरते हैं।

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