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बांग्लादेश के हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की बढ़ी मुश्किल, चटगांव के वकील की हत्या में बनाया गया आरोपी

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ढाका:

राजद्रोह के मामले का सामना कर रहे बांग्लादेश के हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास पर हत्या का आरोप भी लगा है। दास को बीते साल चटगांव कोर्ट में वकील सैफुल इस्लाम अलीफ की हत्या में आरोपी बनाया गया है। वकील सैफुल की पिछले साल 7 नवंबर को कोर्ट परिसर में हत्या कर दी गई थी। सोमवार को चटगांव मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एसएम अलाउद्दीन ने पुलिस की अर्जी मंजूर करते हुए दास की मर्डर के मामले में गिरफ्तारी दिखाई। अदालत ने यह आदेश वर्चुअल सुनवाई के दौरान दिया। दास बीते साल नवंबर से जेल में हैं।

ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव मेट्रोपॉलिटन सेशंस जज कोर्ट के सरकारी वकील मोफिजुल हक के हवाले से बताया है कि जांच अधिकारियों ने रविवार को चिन्मय दास को चार मामलों में गिरफ्तार दिखाने की अर्जी दी थी। अदालत ने सोमवार को अलीफ हत्याकांड में वर्चुअल सुनवाई के बाद गिरफ्तारी दिखाई। बाकी तीन अर्जियों पर सुनवाई मंगलवार को होगी।

राजद्रोह के मामले में हुए थे गिरफ्तार
इससे पहले 30 अप्रैल को बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट के अपीलीय डिवीजन ने दास को राजद्रोह के मामले में जमानत देने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी। बांग्लादेश हाईकोर्ट ने पहले दास को जमानत दी थी, जिसपर रोक लगा दी गई। दास को पिछले साल 25 नवंबर को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान का आरोप है। उनकी गिरफ्तारी के बाद चटगांव में प्रदर्शन और हिंसा हुई थी। इसी दौरान वकील सैफुल इस्लाम की मौत हुई थी। अब सैफुल की हत्या के मामले में भी दास को आरोपी बनाया गया है।

चिन्मय दास बांग्लादेश सनातनी जागरण जोते के प्रवक्ता और इस्कॉन के पूर्व नेता हैं। चिन्मय कृष्ण दास चटगांव के सातकानिया उपजिला के रहने वाले हैं और स्थानीय लोगों में अपने धार्मिक प्रवचन के लिए पहचान रखते हैं। चिन्मय दास 2016 से 2022 तक इस्कॉन चटगांव के सचिव रह चुके हैं। वह चटगांव के हाथाजारी के पुंडरिक धाम के प्रधान भी रहे हैं।

दास बीते साल बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के आरोप लगने के बाद चर्चा में आए थे। भट्टाचार्य को आननफानन में एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ ना सिर्फ बांग्लादेश बल्कि भारत में भी प्रदर्शन देखने को मिले थे। भारत सरकार ने भी उनकी गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था।

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