मुंह के छाले (Mouth Ulcers) लाल-सफेद उभार होते हैं जो जीभ, होंठ, मसूड़ों या गालों के अंदरूनी हिस्से में हो सकते हैं. ये अक्सर कई कारणों से होते हैं और सामान्यतः खुद ही ठीक हो जाते हैं, लेकिन ठीक होने में कई दिन लग सकते हैं, जिससे लगातार दर्द बना रहता है.
अगर आप भी रातोंरात मुंह के छालों से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो पतंजलि के आयुर्वेदिक विशेषज्ञ आचार्य बालकृष्ण के बताए इस नुस्खे को आज़मा सकते हैं. आचार्य बालकृष्ण ने अनार के पत्तों के पानी से कुल्ला करने का तरीका बताया है, जिससे छालों को ठीक करने में मदद मिलती है.
अनार के पत्तों से छालों का आयुर्वेदिक इलाज
आचार्य बालकृष्ण बताते हैं कि अनार के पत्ते (Pomegranate Leaves) छालों को रात भर में ठीक करने में उपयोगी हो सकते हैं.
- नुस्खा (Quath Recipe):
- 20 से 25 अनार के पत्ते लें और उन्हें हल्का सा कूट लें.
- इसमें 400 ग्राम पानी डालकर अच्छी तरह उबालें.
- जब पानी सूखकर 100 ग्राम रह जाए, तो इसे छान लें.
- इस्तेमाल: इस हल्के गरम पानी को मुंह में डालकर कुल्ला (Rinse) करें.
अनार के पत्ते चबाने का तरीका
कुल्ला करने के अलावा, अनार के पत्तों को सीधा चबाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
- चबाना: पत्तों को अच्छी तरह धोकर चबाएँ.
- थूक दें: चबाने के बाद बनने वाली लार को निगलें नहीं, बल्कि थूक दें. आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, ऐसा करने से भी मुंह के छालों में कमी आती है.
बाबा रामदेव द्वारा सुझाए गए अन्य आयुर्वेदिक उपाय
मुंह के छालों के उपचार के लिए बाबा रामदेव ने भी कुछ अन्य प्राकृतिक उपचार बताए हैं:
- पत्ते चबाना: गेंदा (Marigold), आड़ू (Peach), या मरुआ (Maruwa) के पत्तों को चबाने से भी छालों में आराम मिलता है.
- नीला थोथा: बाबा रामदेव नीला थोथा (Blue Vitriol) को छालों के लिए रामबाण बताते हैं.
- प्रयोग: नीला थोथा (जो बाज़ार में आसानी से उपलब्ध है) को लेकर तवे पर हल्का सा भून लें. इसे छालों पर लगाएँ और लार को बाहर थूक दें.
मुंह के छालों के मुख्य कारण
मुंह के छालों के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से ज़्यादातर लाइफस्टाइल या छोटी चोटों से जुड़े होते हैं:
- आंतरिक चोट: मुंह के अंदरूनी हिस्से में चोट लगना या गलती से गाल या जीभ का कट जाना.
- पेट की गड़बड़ी: पेट ख़राब होना या कब्ज़ की समस्या.
- तनाव और नींद की कमी: ज़्यादा तनाव (Stress) लेना या पर्याप्त नींद न लेना.
- पोषण की कमी: विटामिन की कमी (खासकर $\text{Vitamin B}_{12}$, $\text{Iron}$, $\text{Zinc}$) या बैक्टीरियल/फंगल संक्रमण.
