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Tuesday, March 17, 2026
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ट्रंप की जीत का जश्‍न जल्‍दबाजी तो नहीं… भारत को मानते हैं ‘टैरिफ किंग’, क्‍या मोदी की बढ़ाएंगे मुश्किलें?

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नई दिल्‍ली

अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव में डोनाल्‍ड ट्रंप की जीत से ज्‍यादातर भारतीय खुश हैं। बुधवार को भारतीय शेयर बाजारों में आई तेजी से इस मूड को समझा जा सकता है। हालांकि, यह नहीं भूलना चाहिए कि ट्रंप भारत को बहुत बड़ा व्यापार कानूनों का उल्लंघनकर्ता मानते हैं। इतना ही नहीं, वह भारतीय सामानों पर टैक्स बढ़ा सकते हैं। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसलिए अमेरिका में होने वाले बदलावों का असर भारत पर भी पड़ेगा।

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। साल 2024 में दोनों देशों के बीच लगभग 120 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। यह चीन के साथ भारत के कुल व्यापार से भी ज्‍यादा है। लेकिन, चीन के उलट अमेरिका के साथ भारत का व्यापारिक रिश्ता फायदेमंद है। इसीलिए अमेरिका भारत के लिए विदेशी मुद्रा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

हालांकि, भारत दूसरे देशों के साथ भी अपने व्यापार को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। लेकिन, पिछले एक दशक में अमेरिका पर भारत की निर्भरता और बढ़ी है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2022-23 में भारत के कुल निर्यात का 18% हिस्सा अमेरिका का था। वहीं, 2010-11 में यह आंकड़ा 10% था। भारत अमेरिका को कई तरह के सामान निर्यात करता है। इसमें कपड़े से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान और इंजीनियरिंग उत्पाद शामिल हैं।

ट्रंप तोड़ चुके हैं परंपरा
अपने पहले कार्यकाल के दौरान, ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए भारत और अन्य देशों से आने वाले स्टील पर 25% और एल्युमीनियम पर 10% टैरिफ लगा दिया था। ऐसा करते हुए ट्रंप ने उस परंपरा को तोड़ा, जिसके तहत अमेरिका अपने मित्र देशों पर टैरिफ नहीं लगाता था। वहीं, बाइडेन ने इन टैरिफ को हटाने के बजाय भारत और यूरोपीय संघ के साथ बातचीत का रास्ता चुना।

भारत को मानते हैं ‘टैरिफ किंग’
ट्रंप भारत में लगने वाले ऊंचे टैरिफ को लेकर भी कई बार अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। इन टैरिफ का असर हार्ले-डेविडसन जैसी अमेरिकी कंपनियों पर पड़ता है। पिछले महीने एक रैली में ट्रंप ने चीन, ब्राजील और भारत की आलोचना की थी। उन्होंने भारत को ‘टैरिफ किंग’ और ‘व्यापार कानूनों का उल्लंघनकर्ता’ बताया था। 2014 में भारत में औसत टैरिफ 13% था। यह 2022 में बढ़कर 18.1% हो गया। इससे वियतनाम, थाईलैंड और मेक्सिको जैसे देशों की तुलना में भारतीय उद्योग प्रतिस्पर्धा में पिछड़ गए हैं।

क्‍या रहा है भारत का तर्क?
भारतीय नीति निर्माताओं का तर्क है कि ज्‍यादातर देशों ने अपने विकास के शुरुआती दौर में घरेलू उद्योगों को सुरक्षा देने के लिए ऊंचे टैरिफ लगाए थे। भारत भी अपने मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सेक्‍टर को बढ़ावा देने के लिए ऐसा ही कर रहा है। सरकार ने 14 प्रमुख सेक्‍टरों के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं शुरू की हैं। वह स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल कर रही है। कई स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण क्षेत्रों को अभी भी चीनी उत्पादों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

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