14.6 C
London
Thursday, June 4, 2026
Homeराजनीतिभ्रम दूर कर लें सांसद, आपराधिक मामलों में कोई मुरव्वत नहीं... सभापति...

भ्रम दूर कर लें सांसद, आपराधिक मामलों में कोई मुरव्वत नहीं… सभापति ने साफ कर दी बात

Published on

नई दिल्ली

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने शुक्रवार को साफ कर दिया है कि आपराधिक मामलों में सांसदों को कोई मुरव्वत नहीं है। नायडू ने कहा कि उच्च सदन के सदस्यों को सिविल मामलों में जरूर कुछ विशेषाधिकार मिले हुए हैं लेकिन आपराधिक मामलों में उनके पास ऐसा कोई विशेषाधिकार नहीं है। दरअसल विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने गुरुवार को सदन में आरोप लगाया था कि संसद का सत्र जारी रहने के बावजूद उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा समन भेजा गया है।

शिवसेना के सदस्य अपने नेता संजय राउत को ईडी द्वारा गिरफ्तार किए जाने का मुद्दा भी पिछले कुछ दिनों से उठा रहे हैं। शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी ने भी यह मामला उठाया था कि संसद का सत्र चल रहा है और राउत को ईडी ने गिरफ्तार किया है। आज सुबह भी 11 बजे सदन की बैठक शुरू होने पर हंगामा कर रहे कांग्रेस सदस्यों ने कहा कि सत्र के दौरान खड़गे को ईडी का समन भेज कर उन्हें अपमानित किया गया।

संविधान के 105वें अनुच्छेद के मुताबिक संसद सदस्यों को कुछ विशेषाधिकार
विपक्षी नेताओं की इन बातों का संज्ञान लेते हुए नायडू ने सदन में ऐसे मामलों में कानूनी स्थिति और सदन में पूर्व में दी गई व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सदस्यों में एक गलत धारणा है कि एजेंसियों की कार्रवाई के खिलाफ उनके पास कोई विशेषाधिकार है। उन्होंने कहा, ‘संविधान के 105वें अनुच्छेद के मुताबिक संसद सदस्यों को कुछ विशेषाधिकार हैं। इनमें एक विशेषाधिकार यह है कि सत्र के आरंभ होने या समिति की बैठकों में शामिल होने के 40 दिन पहले और इसके समाप्त होने के 40 दिनों के भीतर किसी भी संसद सदस्य को सिविल मामले में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।’

उन्होंने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 135 के सेक्शन ‘ए’ में इसका उल्लेख भी है। सभापति ने कहा, ‘‘हालांकि आपराधिक मामलों में सांसद किसी आम नागरिक से अलग नहीं हैं। इसका मतलब यह है सत्र के दौरान या वैसे भी, सांसदों के पास गिरफ्तार होने से बचने का कोई विशेषाधिकार नहीं है।’’ उन्होंने इस बारे में आसन की ओर से पूर्व में दी गई कुछ व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया।

‘जब सत्र चल रहा हो तो सदस्यों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता’
ऐसे ही एक मामले में वर्ष 1966 में तत्कालीन सभापति जाकिर हुसैन द्वारा दी गई एक व्यवस्था का जिक्र करते हुए सभापति नायडू ने कहा कि संसद सदस्यों के कुछ विशेषाधिकार हैं ताकि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें। पूर्व उपराष्ट्रपति हुसैन द्वारा दी गई व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा ही एक विशेषाधिकार है कि जब सत्र चल रहा हो तो सदस्यों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता लेकिन यह स्वतंत्रता सिर्फ सिविल मामलों में है, आपराधिक कार्रवाइयों में नहीं है। नायडू ने कहा कि उन्होंने भी एक बार सदन में व्यवस्था दी है कि जांच एजेंसियां अगर किसी को बुलाती हैं तो सदस्यों को उसमें शामिल होना चाहिए ना कि सदन चलने को कारण बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कानून का पालन करना सभी का कर्तव्य है।

Latest articles

ईडी की बड़ी कार्रवाई: पूर्व ईएनसी गोविंद मेहरा और आबकारी अधिकारी भदौरिया की 85.45 करोड़ की संपत्ति कुर्क

भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मप्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी डिजिटल और...

एम्स भोपाल में दुर्लभ सर्जरी सफल, एक ही ऑपरेशन में दो अलग-अलग कैंसर को किया खत्म

भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के डॉक्टरों ने जटिल कैंसर उपचार के...

भोपाल में अवैध कॉलोनियों पर फिर नोटिस कार्रवाई, तीन साल में 300 एफआईआर के बावजूद नहीं हुई एक भी गिरफ्तारी

भोपाल। भोपाल में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ प्रशासनिक और नगर निगम की कार्रवाई एक...

एनएचएम के 32 हजार संविदा कर्मचारी हड़ताल पर, 8 जून को मुख्यमंत्री आवास घेराव की चेतावनी

भोपाल। मप्र में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत करीब 32 हजार संविदा...

More like this

एक जिला एक उत्पाद’ नीति से राजस्थान के स्थानीय उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने...

1 अप्रैल से भोपाल में प्रॉपर्टी खरीदना होगा महंगा, 740 लोकेशन पर बढ़ेगी कलेक्टर गाइड लाइन

भोपाल राजधानी भोपाल में 1 अप्रैल से प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो जाएगा। जिले की कुल...

इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी को बचाने के लिए कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन: पट्टा धारियों के घर तोड़ने की कार्रवाई का विरोध

भोपाल राजधानी के वार्ड 66 स्थित इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी के निवासियों के आशियानों पर मंडरा...